Skip to content
SarvaKosh
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

Page 742 of 1367

Read in context
Page 742

जैसे मनुष्योंके समीप कीड़े मकोड़े ऐसेही उनके समक्ष मनुष्य क्या वस्तु हैं। बरन् इससे भी तुच्छ है इन सभोंका अन्त है, अनन्त कैसे जाना जावे ?

वेदके सिवा दूसरी पुस्तकोंकी सामर्थ्य नहीं कि, इन सूक्ष्म बातोंको प्रगट करें सूक्ष्म बातोंकी उनको तनिकभी सुध नहीं। साधुओंमेंभी कदाचितही कोई ऐसा होगा जो इन बातोंको समझे और सोचे, ये बातें बड़ी सूक्ष्म हैं। इन बातोंके समझनेवाले केवल हंस कबीर हैं, दूसरेकी ऐसी बुद्धि नहीं कि, भली प्रकार इसको जान सके। इन अहंकारी और नौ कोषोंमें सब कौतुक क्रीड़ा होरही है।

मनुष्यके सोचने समझने तथा कार्य करनेके लिये यह सब सूक्ष्म बातें दिखाई गई हैं। जो मनुष्य हो वो इन बातोंपर ध्यान देकर विचार करे। जिस किसीकी समझमें ये बातें ठीक मालूम होंगी अपनेको अन्धकारमें फँसा देखेगा वह अवश्यही प्रकाशमय पथको ढूँढ़ेगा। इन पांचों अहंकारों तथा नौ कोषोंसे बाहर निकालनेवालेका उपदेश जब पावेगा तब यह सब बातें जो लोक और वेदमें प्रबलित हैं सभी यथार्थ रूपसे जैसीकी तैसी दिखाई देंगी।

उनपर अत्यन्त खेद है जिनके कि, विचारमें इन पांचों अहंकारों और नौ कोषकी बातें नहीं आईं। फिरभी वो आपको पण्डित तथा ज्ञानी समझते हैं। अपने बन्धनपर तनिक भी ध्यान नहीं करते और दूसरेके छुटकारेके लिये उद्योग किया करते हैं। जिसका गुरु स्वयम् राह भूला हो तो उसका शिष्य किधर जायगा ? ऐसा कौन भाग्यवान् है जो पारख गुरुको ढूँढ़कर उसके चरणकी धूल हो जावे ? संसारकी गन्दगियोंसे विशुद्ध हो जावे ? धन्य वह मनुष्य है जिसने पारख गुरुको शीघ्रातिशीघ्र पा लिया।

वासनाओंकी बाढ़से कोई विशुद्ध तथा स्वच्छ हो नहीं सकता। सब गुरु पुकारते हैं कि, विषय वासना नरककी राह है, इनसे दूर भागो। परन्तु तो भी गुरु तथा शिष्य विषय वासनाके बन्धनमेंही फँसे हुए हैं बिना पारखगुरुके किसीमें छुडानेका सामर्थ्य नहीं। वैद्य तो रोगीसे कहता है कि, तुम संयमसे रहो नहीं तो मर जाओगे। वैद्यका कहना सुनते तो हैं पर उसपर कोई स्थिर नहीं है। इसपर मैं एक दृष्टांत लिखता हूँ।

एक राजाने आम खाया वो उस आमके खानेसे बीमार हो गया तब वैद्यने बहुत औषधि की अत्यन्त कठिनाईसे आरोग्य हुआ वैद्यने राजासे कह दिया कि, अब आप भविष्यमें फिर कभी आम न खाना, यदि आम खाओगे तो मर जाओगे। आपका यह रोग ऐसाही है। राजाने यह जान ली। एक दिवस राजा अपने बागमें सैरके लिये गया बगीचेका माली अच्छे अच्छे भीठे आम राजाके सामने लाया।