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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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नौ कोषोंका विवरण

१-अन्नमय कोष देह स्थूल । २-शब्दमय कोष देह विराट् । ३-प्राणमय कोष देह लिङ्ग । ४-आनन्दमय कोष देह हिरण्यगर्भ । ५-मनोमयकोष देह कारण । ६-प्रकाशमय देह अव्याकृत । ७-ज्ञानमय देह महाकारण । ८-आकाशमय देह मूल प्रकृति । ९-विज्ञानमय देह कैवल्य ।

१ अन्नमय कोष-जाग्रित अवस्था । क्षिमाभूमिका । पपील मार्ग । पृथ्वी-तत्त्व । रजोगुण । मुद्रा खेचरी । त्रिकुटी स्थानके जठराग्नि । घट आकाश काम जल । प्रध्वंसाभाव । ये इस कोषको हैं ।

२ शब्दमय कोष-स्वयं सिद्धि अवस्था । विराट् देह । पृथ्वी तत्त्व । गुण ब्रह्मा । मुद्रा सम्मुखी । कण्ठस्थान । विविध भूमिका । निर्मर्ग । महद अन-घट । जलपर्व । विम्बाकाश । सत्यलोक स्थान । महाप्रध्वंसाभाव । महाजल । ये इस कोशके हैं । अपना शरीर छोड़कर * योगी लोग दूसरे शरीरमें घर बना लेते हैं । सो शब्दमय कोष है ।

३ प्राणमय कोष-श्रीहठ स्थान । स्वप्नावस्था । सूक्ष्म जल तत्त्व । सतो-गुण । मुद्रा भूचरी । कामाग्नि । मठ आकाश । उद्यान वायु । विहङ्ग मार्ग । लिङ्ग देह ।

४ आनन्दमय कोष-आनन्दमय कोष-हिरण्य गर्भ देह । विशिष्टाद्वैत-भाव । गोलाहठस्थान । विष्णुलोक । मनभूमिका । तुरिया अवस्था (स्वप्न और सुषुप्तिके मध्य) योग अग्नि । रेचक वायु जल मार्ग । चाचरी मुद्रा । विष्णु-गुण । अभराकाश ।

५ मनोमय कोष-कारण देह । हृदय स्थान । सुषुप्ति अवस्था । स्वलिष्टा भूमिका । मन्दाग्नि । महदाकाश । अनन्य भाव कपिमार्ग । मुद्रा उत्मोलिनी । अग्नि तत्त्व । तमोगुण । प्राण वायु ।

६ प्रकाशमय कोष-हेठ पीठस्थान । अव्याकृत देह । शिवलोक । शिवगुण । चित्त भूमिका । प्रातः सन्धि अवस्था । ज्ञान अग्नि । अहम्भाव । पोहर्ष वायु । सूर्य मार्ग । शाम्भवी मुद्रा । चिद् चिद् विशिष्टाकाश । अनिमादिक आठ सिद्धि ।

७ ज्ञानमय कोष-नाभिस्थान । महाकारण देह । शुद्ध सतोगुण । तुरिया अवस्था । सुलिष्टता भूमिका । अत्यन्ताभाव । बड्वाग्नि । समान वायु । मन मार्ग । अगोचरी मुद्रा । चिदाकाश । सविकल्प समाधि ।


  • योग शास्त्र विभूति पादके ३८ वें सूत्रमें तो यह लिखा हुआ है कि, चित्तके बन्धनके जो शरीरमें कारण हैं उनके ढीला करनेसे एवं चित्तके जाने आनेके मार्गके साक्षात्कारसे चित्त दूसरे शरीरमें प्रविष्ट हो जाता है इसके साथ सभी दूसरे शरीरमें घुस जाते हैं ।