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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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राजा भूपाल ।

कबीर सागर ५ में बोधसागर है। उसीमें भोपाल बोध भी है। उस ग्रन्थमें इस प्रकार लिखा है कि, धर्मदासने कबीर साहबसे पूछा कि, ऐ सत्यगुरु ! काल चोर जो जीवनको मारता है वो किस प्रकार मारता है ? आप उसका वृत्तान्त मुझसे कहिए। यह बात सुनकर सत्यगुरु बोले कि, ऐ धर्मदास ! मैं इसके मारनेका लक्षण बताता हूँ तुम सुनो। धर्मरायने यमको आज्ञा दी कि, ऐ यम ! तुम पृथ्वीपर जाओ वहाँ मनुष्योंकी अधिकता हो गई है, पृथ्वीसे बोझ सहन नहीं होता है। तुम मनुष्योंको मारकर मेरे पास लेआओ, सबके भीतर वायुस्वरूप होकर समाजाओ। सब मनुष्योंमें रोग उत्पन्न करो। खोसी ज्वर, कंपानेवाला ज्वर, तिजारी, काम, क्रोध, लोभ, मोह तथा और भी अनेकों फौसी डालकर सब मनुष्योंको फँसाओ इसी फन्दमें सब फँसे हैं। सुकृतजीको कोई पहचानता नहीं है। इस कारण मैं तुमको भेजता हूँ। ऐ यम ! धर्मराजकी इतनी बात सुन; यम आकर सबको दुख देने लगा। सत्यलोकमें सत्यपुरुषका वचन हुआ कि, ए सत्य सुकृतजी ! तुम संसारमें जाओ सारशब्दका उपदेश करो, जिसमें कालपुरुष हंसको न पासके। ज्ञानी जी पुरुषकी आज्ञा स्वीकार कर सत्यपुरुषको प्रणाम करके जालन्धर देशमें आये। वहाँ का राजाका नाम राजा भूपाल था। इस राजाके द्वारपर ज्ञानीजी महाराज जिन्दारूप धरकर जा खड़े हुए। चोपदारसे कहा कि, राजाको हमारे पास बुला लाओ। वह हमारा दर्शन करे, हमारे दर्शनसे उसके सब पाप दूर हो जावेंगे, कर्मके बंधन कट जावेंगे। वहाँ द्वारपर ताला लगा हुआ था, भीतर जानेका कोई पथ नहीं था। बहुत चौकीदार बैठे थे। उनमेंसे देखकर कितने कहने लगे कि, यह ठग है। कोई कहता कि, यह बटमार है। कोई कहता है कि, इसको मारकर निकाल दो, यही चोर है, ब्रह्मकी बातें करता है, निर्गुणका भेद किसीको मालूम नहीं हुआ। इसी प्रकारकी बातें कहते सुनते सारी रात बीत गई, भोर हो गया। उस समय ज्ञानीजीने कुछ अपना कौतुक दिखलाया कि, द्वार फट गए महलोंके कँगूरे गिरने लगे, टूट टूट सब आकर पृथ्वीपर पड़े। ज्ञानी जी राजाके पास चले। यह कौतुक देखकर सब लोग आश्चर्यान्वित हुए, ज्ञानीजीके पीछे पीछे होलिये। जहाँ राजा बैठा था वहाँ चौबदार दौड़कर गया। पुकार की कि, महाराज ! यह जिन्दा बड़ा चोर है। उसने कहा था कि, द्वार खोलो। हमने उसका वचन न मानकर उसको रात को रोक रक्खा था। इस कारण जिन्देने एक मंत्र पढ़ा समस्त द्वार फट गए कँगूरे टूटकर गिर गये जिन्दा भीतर चला आया, उसके पीछे