कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
Page 436 of 1367
Read in contextनिमित्त जीवित रहें। ईसूने उत्तर दिया कि, मुझे भला क्यों कहता है? कोई भला नहीं बरन् वही एक जगदीश्वर भला है, बाकी कुछ नहीं।
लूकाकी इज्जीलका—(१२) बाब (४९) आयत, मैं पृथ्वीपर अग्नि लगानेलगाने आया हूँ, मैं कियाही चाहता हूँ कि, लगचुकी होती (५०) पर एक बपतिस्मा पाना है, मैं कौसा तङ्ग हूँ जबलों कि, पूरा न हो (५१) क्या तुम समझते हो कि मैं पृथ्वीपर मेल कराने आया हूँ, नहीं मैं कहता हूँ कि, पृथक् करने आया हूँ।
(५) बाब, ऐसा हुवा कि, जब परमेश्वरके वचन सुननेके निमित्त लोग गिरे पड़ते थे, ईसू शमऊनकी नावपर चढ़कर उपदेश दे रहा था। शमऊनसे कहा कि, आखेटके निमित्त अपना जाल डालो तब उसने उत्तर दिया कि, ए परमेश्वर! हमने समस्त दिवस परिश्रम किया पर कुछ न पकड़ा परन्तु तेरे आदेशसे जाल डालता हूँ। जब जाल डाला तब वह मछलियोंसे ऐसा भर गया कि, वह अकेला खींच न सका, दूसरोंकी सहायतासे खींचकर नाव मछलियोंसे भरली। शमऊनने ईसूपर विश्वास किया और उसके चरणोंपर गिरा। तब ईसूने कहा कि, तू भयभीत न हो इस घड़ीसे तू मनुष्योंका आखेटकारी होगा, सब कुछ छोड़कर शमऊन इसूक पीछे होलिया। (२२) ईसूने अपने शिष्योंको आज़ा दी कि, असि खरीदकर बाँधो।
योहूनकी इज्जील—(१४) बाब (८) आयत, फ़ीलबोसने कहा कि ए परमेश्वर पिताको हमें दिखला कि, हमें यथेष्ट हैं। (९) ईसूने उससे कहा कि, ए फ़ीलबोस! इतने समयसे मैं तेरे साथ रहता हूँ और तूने मुझे न जाना जिसने मुझे देखा उसने मेरे पिताको देखा, फिर तू कौसे कहता है कि, पिताको हमें दिखला, क्या तू निश्चय नहीं करता है कि, तेरा पिता मैं हूँ, पिता मुझमें है? यह बातें जो मैं तुझे कहता हूँ मैं आपसे नहीं कहता परन्तु मेरा पिता जो मुझमें रहता है, वह बातें करता है।
करनतियूनके लिये पोलूस रसूलका पत्र।
(१) बाब (९) आयतमें विद्वानोंकी विद्वत्ता एवम् समझवालोंकी समझको तुच्छ करूँगा। विद्वान् कहो फ़क्रियः कहो इस संसारका विवाद करने-वाला क्या, परमेश्वरने इस संसारके बुद्धिमानोंकी मूर्खता नहीं ठहराई। तथा (८) बाब (१६) आयत और जब इसने नवीन की, तब पहलेको मिथ्या ठहराया। वह जो प्राचीन तथा दिनी है मिटनेके समीप है, अर्थात् प्राचीनसे नवीन विशेष शुद्ध है।