Skip to content
SarvaKosh
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

Page 258 of 1367

Read in context
Page 258

नवों प्रकरण ।

कबीरसाहबकी ४ थी, ५ वीं, ६ छठी और ७ वीं बार
प्रकट होनेका वृत्तान्त ।

४—"मूसा बोध" जिसमें कबीर साहबका हजरत मूसाको शिक्षा देनेका वर्णन है ।

५—"दाऊद बोध" जिसमें सदगुरुने हजरत दाऊदको उपदेश किया है ।

६—"सुलेमान बोध" जिसमें कबीर साहबने नवी सुलेमान बादशाहको शिक्षा दी है ।

७—"ईसा बोध" इसमें कबीर साहबने ईसाको उपदेश किया है ।

ये चारों बोध, मैंने अभीतक नहीं देखे, अपने कानोंसे तो सुना है कि, ये सब ग्रन्थ कबीर पंथियोंके पास हैं । ढूँढने तथा देखनेसे इनकी व्यवस्था प्रगट होगी । ×

दशवाँ प्रकरण ।

मुहम्मद साहबको चेतानेका वृत्तान्त ।

आठवीं बार कलियुगमें कबीर साहबका पृथ्वीपर प्रगट होना ।

(मुहम्मद साहबको रक्तपातसे हटाना, मेआराज मुहम्मद होना और मुहम्मद साहबको सत्यपुरुषका दर्शन कराना । सब आकाशोंकी सैर कराकर फिर मक्कः नगरमें प्रवेशित कराना और मुहम्मद तथा समस्त मुहम्मदियोंको मुक्तिकी आज्ञा कराना तथा रसुलल्लाःको पाँच कलमा पढ़ाना । चार कलमा प्रगट करने और पाँचवाँ कलमा गुप्त रखनेके निमित्त सावधान करना और मुहम्मदसाहबको आशीर्वाद देकर अन्तर्धान होजानेका वृत्तान्त वर्णन ।)

मुहम्मद साहबको चालीस वर्षकी वयमें पैगम्बरी मिली तब उन्होंने मुसलमानी धर्मका प्रचार किया । वह बलपूर्वक लोगोंको मुसलमान करने लगे और बहुत लोगोंको बंदी बनाकर उनके हाथ पैरमें जञ्जीरें डाल दीं और आज्ञा दी कि, जो मुसलमान होजावे उसको जीवित रखो तथा अन्यान्यका घात करो । बहुतसे मनुष्य मारे गये, जब व्यथित मनुष्योंकी क्रंदनध्वनि सत्यलोकपर्यन्त पहुँची, तब सत्यपुरुषको दया आयी और मुक्तामणिजीसे कहा कि, हे मुक्तामणिजी !

× ये सब ग्रन्थ मेरे पुस्तकालयमें उपस्थित हैं, सदगुरुकी कृपा होगी तो समयपर प्रकट करनेका प्रयत्न किया जायगा.

अनुवादक—श्रीयुगलानंद बिहारी.