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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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आप किसी अन्य ध्यानको मनमें आने न दीजिये और ऐसा न कीजिये कि, जिसमें मेरा काम बिगड़े; आप यह भी सुन लीजिये कि, यदि आप पृथ्वीपर जावेंगे तो कोई मनुष्य आपका कहना न मानेंगे, बरन् आपको तुच्छ बनानेका उद्योग करेंगे और मेरी ओर होकर आपसे वादविवाद तथा बँर करेंगे।

छठी प्रकरण ।

निरञ्जनके जालका वर्णन ।

मैंने समस्त मनुष्योंकी बुद्धि पर परदा डाल दिया है और सबको अचेत कर, दिया है, मैंने सब मनुष्योंके फँसानेके लिये ऐसे ऐसे जाल रच रखे हैं कि, 'इन्होंने' समस्त मनुष्य फँसे हुए हैं। वेद, शास्त्र, तीर्थ, व्रत मूर्तिपूजा, यंत्र, मंत्र हवन यज्ञ, आचार, बलिदान, मांसभक्षण, मदिरापान, परस्त्रीगमन आदि सहस्रों प्रकारके फँदे मैंने बनाये हैं, इनसे बचकर कोई मनुष्य निकल नहीं सकता है। और मेरे तीनों पुत्र भी बड़े शूरवीर हैं, वे तीनों लोकोंके सरदार हैं। यदि आप पृथ्वीपर जाओगे तो आपकी बातको कोई नहीं मानेगा, मैंने समस्त मनुष्य की बुद्धिको अंधेरे कुएँमें डालदी है, प्रत्येकके हृदयमें मेरा स्थान है, सदाकाल सब स्थानोंमें मैं उपस्थित रहता हूँ, किसीकी सामर्थ्य नहीं है कि मेरी सेवासे बाहर जासके, जब जैसा मैं चाहता हूँ तब तैसा मनुष्यकी बुद्धिको फेर देता हूँ, समस्त जीवोंकी बुद्धि मेरे अधीन है।

निरञ्जनकी बात सुनकर कबीर साहबने उत्तर दिया कि, हे काल बटमार। जिस जीवको मैं अपना शब्द सुनाऊँगा उसके ऊपर तुम्हारा कुछ बश नहीं चलेगा, मैं तुम्हारे समस्त फंदोंसे उसको स्वतंत्र कर दूँगा तुम्हारा बल तथा मंत्र उसपर व्यर्थ हो जायगा। फिर निरञ्जनने कहा कि, पृथ्वीपर आप एक पंथ प्रचलित करोगे तो मैं अनेक पंथ चलाऊँगा और वह समस्त धर्म आपके धर्मकी नकल करेंगे, कितने धर्म ऐसे होंगे कि, जो प्रत्यक्षमें तो आपके धर्म कहलावेंगे और यथार्थमें उस धर्मके माननेवाले सब मेरे दास होंगे।

यह बात सुनकर ज्ञानीजीने कहा कि, जो कोई मेरा नाम लेगा और मेरी भक्ति करेगा मैं उसको अपने निजके हँसोंके साथ अपने लोक को पहुँचाऊँगा, तेरी तदबीर और तेरी धूर्तता काम न देगी ॥