कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextजब अपनी युवास्थाको पहुँचता है सर्व प्रकारसे योग्य होता है तब अपना सर्व अधिकार देकर स्वयं अलग हो जाते हैं। जबतक वह किसी बातका अधिकारी नहीं होता तबतक उसकी सब प्रकार रक्षा करते हैं। क्योंकि, यदि दूध पीते बच्चे को कठिन पदार्थ खानेको देदिया जावे तो वह बीमार हो जावेगा यही नहीं वरन् मर जावेगा इसीप्रकार सब जीवधारी भजनमें एक समान हैं पर मुक्तिका पथ केवल मनुष्य शरीरमें है वह सत्यपुरुषकी भक्तिही है। यदि मनुष्य शरीर पाकर भी सत्यपुरुषकी भक्तिके मार्गको न जाना, उसका अस्तित्व और श्रेष्ठताको न पहिचाना, यथार्थ रीतिको छोड़ अन्यथा रीतिसे भजन करे तो पशु और मनुष्यमें क्या भेद हो? केवल सत्यपुरुषकी भक्तिही मनुष्यत्व है। जितने कर्मकाण्डी लोग हैं वे दूध पीते हुए बच्चोंके समान हैं वे ईश्वरीय भेदकी यथार्थताको क्या जानें? अल्पबुद्धिके कारण दूसरोंसे मिथ्याही लड़ते झगड़ते और वाद विवाद करते फिरते हैं।
विचारोंका तत्त्व निर्णय।
७ प्रश्न—सब तत्वज्ञानी विद्वान् तथा माकूलात् व मनकूलात् सत्य हैं कि असत्य?
उत्तर—समस्त मनकूलात् तो सत्य हैं पर उनका यथार्थ आशय विरलाही समझता है। जिनको दिनहीमें न सूझे, अन्धे हों उनको रात को क्या सूझेगा? अनेक (चश्मा) और दूरबीन अन्धोंको क्या लाभ दायक होंगे? पठित अपठित जो देहाभिमानमें पड़कर शरीरकेही पोषण पालनको अपना सर्वस्व समझे बैठे हैं उनको पुस्तकावलोकनसे माकूलात् और मनकूलात्केजाननेसे क्या लाभ हो सकता है?
तीन प्रकारके आनंद।
आनन्द तीन प्रकारका है। विषयानन्द, भजनानन्द, और ब्रह्मानन्द। जो विषयानन्द यानी सांसारिक विषयवासनाकी कामनाको छोड़ दे, वह भजनानन्दके पदको पासकता है। जब तक विषयके स्वादकी तनिक भी हृदयमें चाहना हो तब तक भजनानन्दके पदको पाना कठिनही नहीं बरन् दुर्लभ कार्य है। विषया-
१ जो बुद्धि विचार और प्राकृतिक नियम तथा अनुभव सबसे ठीक हो उसमें कोई ऐसी बात न हो जो कि, बुद्धि और विवेक के प्रतिकूल और प्राकृतिक नियमके विरुद्ध हो, उसे माकूलात् कहते हैं।
२ जिसमें बहुतसी ऐसी बातें होती हैं जो बुद्धिसे बाहर प्राकृतिक नियमके विरुद्ध और असम्भव जान पड़ती हैं, जैसे नानाप्रकारके मत मतान्तरकी पुस्तकोंमें अनेक ऐसी कथायें और बातें लिखी हैं जो असम्भव प्रतीत होती हैं। वे सब मनकूलात् कहाती हैं।