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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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हिन्दू साधू दिल्लीमें गया। उसने छोटे बालकके माथामें विष्ठेकी तो तिलक लगाई और चमड़ेका यज्ञोपवीत गलेमें पहिन लिया। इसी रूपसे फिरता फिरता काजीके सन्मुख गया। काजीने उसे देखतेही उसकी तिलक चाटी पर तिलकके स्वादसे जान गया कि, यह तो मिट्टीकी नहीं बरन् विष्ठेकी तिलक है। फिर यज्ञोपवीत तोड़ा, यज्ञोपवीत तोड़ते समय भी जान लिया कि, यज्ञोपवीत चमड़ेका है। तब तोबा ! तोबा ! करता हुआ अलग हो गया। सुथरेशाहने कहा कि, अलग क्यों जाता है ? तिलकको खूब चाट, यज्ञोपवीतको भी दांतसे काट, अब क्यों भागता है ? जैसे पहले हलाल समझकर यज्ञोपवीत तोड़ना और तिलक चाटना स्वीकार किया था आज भी क्यों नहीं करता !

फिर सुथरेशाहने एक जोड़ा जूता रत्न जटित बहुमूल्य बनवाया। वह जूता सवा हाथ लम्बा था एक कटोरा भी लिया। समय पाकर कटोरेमें पिशाब करके और एक जूता लेकर बड़ी मसजिदमें गुप्तचुप रख दिया कि, किसीने रखते न देखा। सबेरे सब लोग निमाज पढ़नेको आये मसजिदमें ऐसा बड़ा बहुमूल्य जूता देखकर सबोंने बहुत आश्चर्य माना। तमाम शहरमें धूम मच गई। काजी और मुल्लाओंने परस्पर विचार करके निश्चय किया कि, आजरातको खुदा मसजिदमें उतरा था। उसीका यह जूता और प्याला है। ऐसा लम्बा पैर किसी दूसरेका तो होही नहीं सकता। जरूर खुदाहीका है। फिर क्या था शीघ्रही यह समाचार शहर भरमें फैल गया कि, मसजिदमें खुदा उतरा था। उस जूतेको सब मुसल्मानोंने छातीसे लगाया और उस प्यालेमें जो पानी था उसको वजूका बचा हुआ पानी समझकर आखों और माथोंमें लगाया तथा आचमन किया। पिशाब तो यों काममें आ गया और जूता तथा कटोरा पवित्र समझकर बादशाही तोशः खानेमें बड़ी प्रतिष्ठासे रखा गया। मुसल्मान लोगोंको इस बनावसे बड़ा आनन्द प्राप्त हुआ। सबके सब ऐसे फूले कि, सब प्रकारकी चिन्ता और फिकिरोंको भूलकर उत्सव मनाने लगे। कई एक दिनोंके पश्चात् सुथरेशाहने दूसरा जूता हाथमें लेकर शहरमें फिरना आरम्भ किया प्रत्येक मनुष्यसे कहने लगा कि, मेरे जूतेका जोड़ा दूसरा जूता और पिशाब करनेका प्याला कोई चुराकर ले गया है। जिस किसीने लिया हो मुझे दे दो। क्रमशः यह समाचार बादशाहको पहुँचा बादशाहने सुथरे शाहको बुलाकर पूछा कि, तुम्हारा जूता और प्याला कौसा था ? सुथरे शाहने अपना जूता दिखलाकर कहा कि, इसीका जोड़ा था प्यालेका सब रङ्ग ढङ्ग बतलाकर कहा कि, वह मेरा पिशाब करनेका प्याला था बादशाहने जूता और प्याला मँगाकर सुथरेशाहको सामने रखकर कहा कि, इसको पहनकर दिखलावो तो