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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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औलिया आदि पदको प्राप्त होता है, सदाचारसेही यज्ञ, योग, जप, तप, ज्ञान आदिको प्राप्ति होती है, सदाचारसेही गुरु मिलता है, जिससे मोक्ष प्राप्त होती है । सदाचारही कर्तव्य है, जिसमें सदाचार नहीं है वह मनुष्यही नहीं पशु है ।

मुसद्दस

अमल कर ऐ अमल वारा अमल तुझको छुड़ावेगा ।
अमलही फर्ज है तुझपर अमल सद्गुरु मिलावेगा ॥
अमलही दाग सब तेरे गुह्नकी धों बहावेगा ।
अमलगर होश कर कोई हमल मसकन् छुड़ावेगा ॥
जगतमें भरमका फेरा अमल तेरा हटावेगा ।
अमल करले अमल करले अमलही काम आवेगा ॥ १ ॥
अमसे यह जमीं और दीद मंजर सब समावी है ।
कवाकिब और सवाबित मेहरो महकी रोशनाई है ॥
जहाँ यह और जहाँदारो जो कुछ खुद अकल आई है ।
तबक चौदह बनाई है अमलकी सब कमाई है ॥
मकॉ सब पार जावे लामकॉ घरमें बसावेगा ।
अमल करले अमल करले अमलही काम आवेगा ॥ २ ॥
यही मादर पिदर तेरा मिहरवों बहिन और भाई ।
यही फर्जन्द दिलबन्द यही दादा यही दाई ॥
यही ोर्छ अकरवाखुद बतिलफी जोफो बरनाई ।
तेरे आमाल हसनः सब मिलावे मुल्क मोलाई ॥
अमलके वास्ते इनसॉ अमल कर चैन पावेगा ।
अमल करले अमल करले अलमही काम आवेगा ॥ ३ ॥
अमलसे पीर पैगम्बर अमलसे वेद और बानी ।
अमलसे इब्तादा महशर अमलसे रहम रहमानी ॥
अमलसे योग और जुगती अमलसे ब्रह्म ब्रह्मज्ञानी ।
अमलसे सूर गूनागूं वर नक्स हयूलानी ॥
अमल कर नेक सद्गुरु टेक सोई रह बतावेगा ।
अमल करले अमल करले अमलही काम आवेगा ॥ ४ ॥
अमल मखलूक और खालिक अमल का सब पसारा है ।
अमल के वास्ते आदम वशकले खुद सँवारा है ॥
हुआ आदम अल्लाह सूरत अमलका हुक्म धारा है ।