कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
by कबीर साहेब
Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextव्यवहारमें, हिन्दू और मुसलमान, दोनों एकही देशमें, एकही समयमें, एकही स्थानपर एकही उद्यममें लगे हों तो हिन्दू विशेष लाभको प्राप्तकर बहुत सुखी होगा, मुसलमान निर्दयताके कारण दरिद्रता और दुःखमें ही फँसे रहेंगे. क्योंकि जीवधारियोंका रक्तपात करना महापाप है।
हेयताका कारण — जितने मांसाहारी हैं सबका स्वरूप भयानक है. क्योंकि उसकी बनावटमें तमोगुण (अग्नि) का भाग विशेष मिला हुआ होता है, जितने नाज, फल, घास आदिकके खानेवाले हैं उनका दिखाव महान् शान्तिभय एवं धैर्य संयुक्त होता है, क्योंकि, उनकी बनावटमें जलका विशेष अंश होता है। अग्नि — (तमोगुण) शिवका स्वरूप है जो संसारको नष्ट करनेवाली है। जल-विष्णुका स्वरूप है जो संसारका पालन करनेवाला है। सतोगुणको धारण करनेसे मुक्ति है, तमोगुणसे अधमता प्राप्त होती है। इसी कारण तमोगुण हेय समझा जाता है।
भ्रष्ट करनेवाला — तमोगुण शिव स्वरूप है। शिव कङ्काल और भिखारी है तमोगुण रूपी शिवकी स्त्री दरिद्रता है शिव यानी तमोगुणके अनुयायी दरिद्री और भिखारी हैं। विष्णु सतो गुणरूप है—धनी है, लक्ष्मीका पति है, सुख सम्पत्ति सब उसके साथ हैं, इसी लिये सतोगुणी धर्म, लोक परलोकके कल्याणका कारण है, तमोगुण दोनों लोकसे भ्रष्ट करनेवाला है।
रक्तपातका काल — भारत वर्षमें मुसलमानोंके राज्यके पहले धन सम्पत्तिकी कुछ कमी न थी, सब प्रजा सुखसे रहती थी। जबसे मुसलमानी राज्य आया भारत भूमिपर जीर्वाहंसा और रक्तपात होने लगा, तबीसे सब पदार्थोंमें घाटा आने लगा; पापसे पीड़ित पृथ्वी होकर फल फूल और नाज इत्यादि देनेसे रुक गई। जहाँ पहले पचास मन अनाज होता था वहाँ अब बड़ी कठिनतासे दशमनसे भी कम होने लगा, फल आदिककी भी यही दशा है कि, पर्याप्त नहीं होते।
हत्याका प्रायश्चित्त — हिन्दू जातिको धन्य है जो कि, यदि भूलसे संयोगन कोई पशु बंधा हुआ मर जावे अथवा ऐसी चोट लग जावे जिससे कि उसके कारण उसका प्राण निकाल जे वे, तो जिस मनुष्यसे ऐसा काम हुआ हो, उसको घरसे बाहर निकाल देते हैं, उसका छूना भी पाप समझते हैं। वह निकाला हुआ मनुष्य हाथमें एक लकड़ी लेकर भीख मांगता फिरता ये शब्द पुकार पुकारके कहता है “धौरीकी बछिया दिया बनवास” अर्थात् गायकी बछियाने मुझको घरसे निकाल दिया उसको लोग हत्यारा कहते उसको न कोई छूता है न घरके अन्दर घुसने ही देता है। उसको भीख मांगकर खाना वृक्षोंके नीचे सोना तीर्थों तीर्थोंमें स्नान