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जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा

स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)

DevanagariHindipublished479 पृष्ठ

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विषय पृष्ठ
१५०. सञ्जीव जातक .. .. .. .. १३४
[ विद्यार्थी ने मुर्दे को जिलाने का मन्त्र तो सीखा किन्तु
उसे फिर मुर्दा बनाने का नही । एक व्याघ्र ने उसकी
हत्या की । ]
दूसरा परिच्छेद १३६
१. दळ्ह वर्ग १३६
१५१. राजोवाद जातक .. .. .. .. १३६
[ मल्लिक राजा 'जैसे को तैसा' था, किन्तु काशी
नरेश बुराई को भलाई से जीतता था । वही बडा सिद्ध
हुआ । ]
१५२. सिगाल जातक .. .. .. .. १४४
[ सियार ने सिंह-बच्ची से प्रेम-निवेदन किया । उसने
अपने भाइयो से शिकायत की । सियार को मार डालने के
प्रयत्न मे सातो शेर मर गए । ]
१५३. सूकर जातक .. . . १४८
[ सुअर ने शेर को युद्ध के लिए ललकारा । शेर लडने
आया; किन्तु उसके बदन की गन्दगी के कारण बिना
लडे ही सुअर को विजयी मान चला गया । ]
१५४. उरग जातक .. .. .. .. १५२
[ बोधिसत्त्व ने गरुड़ से नाग की रक्षा की । ]
१५५. गग्ग जातक .. .. .. . १५५
[ छींक आने पर 'जीवें' और 'जीवो' कहने की प्रथा
कैसे चली ? ]