Skip to content
SarvaKosh
जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Jataka Kathayen (Authentic Hindi Translation from Pali)

by भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक

Source: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (origin)

DevanagariHindipublished479 pages

Page 385 of 479

Read in context
Page 385

धम्मद्ध ] ३६७
“महाराज, जो एक रात मँ उद्यान बना सकता है। वह राज्य ले सकता
है वा नही ?”
“अब क्या करे ?”
“उससे दूसरा असम्भव कार्य्य कराएँ।”
“ कौनसा काम ?”
“सात रत्नो वाली पुष्करिणी बनवाएँ ।”
राजा ने 'अच्छा' कह बोधिसत्व को बुलाकर कहा—
“आचार्य्य ! तुमने उद्यान तो बना दिया। अब इसके योग्य सात रत्नो
वाली पुष्करिणी बनाएँ। यदि नही बना सकोगे तो तुम्हारी जान जाएगी।”
बोधिसत्व ने कहा—महाराज, अच्छा। बना सकेगे तो बनाएँगे।
शक्र ने सुन्दर, सौ तीर्थों वाली, हज़ार जगह से मुड़ी, पाँच प्रकार के
कमलो से ढकी नन्दन पुष्करिणी¹ सदृश पुष्करिणी बना दी ! बोधिसत्त्व ने
उसे भी प्रत्यक्ष देख राजा से जाकर कहा—देव, पुष्करिणी बना दी।
राजा ने उसे देख काळक से पूछा—अब क्या करे ? 'देव, उद्यान के योग्य
घर बनाने को कहे।' राजा ने बोधिसत्व को बुलवाकर कहा—आचार्य्य,
इस उद्यान और पुष्करिणी के अनुकूल एक ऐसा घर बनाएँ जो सारा का सारा
हाथी दाँत का हो। यदि नही बनाएँगे तो तुम्हारी जान न रहेगी।
शक्र ने उसका घर भी बना दिया। अगले दिन बोधिसत्व ने उसे भी
प्रत्यक्ष देख राजा को कहा। राजा ने उसे भी देख काळक से पूछा—अब
क्या करें ? 'महाराज, घर के योग्य मणि बनाने को कहें।' राजा ने बोधिसत्त्व
को बुलाकर कहा—पण्डित, इस हाथीदांत के घर के अनुकूल मणि बनाओ।
मणि के प्रकाश में घूमेंगे। यदि नही बना सकोगे, तो तुम्हारी जान जाएगी।
शक्र ने उसकी मणि भी बना दी। अगले दिन बोधिसत्त्व ने उसे भी
प्रत्यक्ष देख राजा को कहा। राजा ने देखकर पूछा—अब क्या करें ? "महाराज !
मालूम होता है कि ऐसा देवता है जो धम्मध्वज ब्राह्मण को जो जो वह चाहता
है, देता है। अब जिसे देवता भी न बना सके, ऐसी आज्ञा दें। चारो अङ्गों²
────────
¹ सिहल में 'नन्दा पोक्खरणि' पाठ है। ² चार गुणो ।