जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Jataka Kathayen (Authentic Hindi Translation from Pali)
by भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक
Source: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (origin)
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नदी पर पानी पीते ही हैं। न तेन अनदी होति नदी पर दो पैरो वाले, चार
पैरो वाले, साँप-मत्स्य आदि सभी प्यासे पानी पीते हैं। उससे वह न अनदी
होती है, न जूठी। क्यों? सब के लिए साधारण होने से। जिस प्रकार नदी
जिस किसी के पानी पीने से दूषित नहीं होती, उसी प्रकार स्त्री भी कामुकता के
वशीभूत हो अपने पति के अतिरिक्त किसी दूसरे से सहवास करने से अनिस्त्री
नहीं होती। क्यों? सब के लिए साधारण होने से। न हि स्त्री जूठी होता
है। क्यों? जल-स्नान से शुद्ध हो सकने के कारण। खमस्सु यदि ते पिया, यदि
वह स्त्री तुझे प्रिया है तथा वह अमात्य बहुत उपकारी है; उन दोनों को क्षमा
कर। उपेक्षावान् हो।
इस प्रकार बोधिसत्त्व ने राजा को उपदेश दिया। राजा ने उसका उप-
देश मान 'फिर ऐसा पापकर्म न करना' कह दोनों को क्षमा किया। उसके
बाद से वह विरत रहे।
राजा भी दानादि पुण्य कर्म करते हुए मरने पर स्वर्ग सिधारे। कागल
नरेश भी यह धर्मदेशना सुन उन दोनों को क्षमा कर उपेक्षावान् हुआ।
शास्ता ने यह धर्मदेशना ला जातक का मेल बैठाया। उस समय
राजा आनन्द था। पण्डित अमात्य तो मैं ही था।
१६६. वालाहस्स जातक
"ये न काहन्ति ओवाद..." यह शास्ता ने जेतवन में विहार करते
समय.एक उत्कण्ठित भिक्षु के बारे में कही।
क. वर्तमान कथा
शास्ता ने उस भिक्षु से पूछा- "क्या तू सचमुच उत्कण्ठित है ?" "सच-
मुच" कहने पर पूछा-किस कारण से उत्कण्ठित है ? उसने उत्तर दिया-