जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Jataka Kathayen (Authentic Hindi Translation from Pali)
by भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक
Source: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (origin)
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शास्ता ने यह धर्म-देशना ला जातक का मेल बैठाया।
उस समय पाँच सौ गधे यह जूठन खाने वाले थे। पाँच सौ सैन्धव घोडे
यह उपासक। राजा आनन्द। अमात्य-पण्डित तो में ही था।
१८४. गिरिदत्त जातक
“दूसितो गिरिदत्तेन ...” यह शास्ता ने वेळुवन में रहते समय विरोधी पक्ष
का साथ देने वाले एक भिक्षु के बारे में कही।
क. वर्तमान कथा
पहले महिलामुख जातक¹ में जो कथा आई है, इसकी कथा भी उसी
प्रकार है। शास्ता ने कहा, भिक्षुओ, यह केवल अभी विरोधी पक्ष का साथ
देने वाला नहीं है, पहले भी यह विपक्ष-सेवी ही रहा है। इतना कह पूर्व-जन्म
की कथा कही।
ख. अतीत कथा
पूर्व समय में वाराणसी में सामराजा नाम के राजा का राज्य था। उस
समय बोधिसत्त्व अमात्यकुल में पैदा हो बड़े होने पर उसके अर्थ-धर्मानुशासक²
हुए।
राजा का पण्डव नाम का मङ्गल घोड़ा था। उसके शिक्षक का
नाम था गिरिदत्त। वह लँगड़ा था। रस्सी पकड़ कर आगे आगे (लँगड़ाते
¹ महिलामुख जातक (१. ३. ६)
² लौकिक तथा नैतिक दोनों विषयों में सलाहकार।
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