जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Jataka Kathayen (Authentic Hindi Translation from Pali)
by भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक
Source: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (origin)
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Read in contextअलीनचित्त ] १५६
एक तरुण ने उस यक्ष का दमन कर उसे दूत की तरह विनीत कर रखा है।”
राजा ने बोधिसत्त्व को बुलाकर सेनापति के स्थान पर नियुक्त किया।
और पिता का बहुत सत्कार किया।
राजा यक्ष को बलि-ग्रहण का अधिकारी बना, बोधिसत्त्व के उपदेशानुसार
चल दान आदि पुण्य-कर्म कर स्वर्ग सिधारा।
शास्ता ने यह धर्म-देशना ला 'जीवं' और 'जीवो' कहने की प्रथा उस समय
चली, कहा और जातक का मेल बैठाया।
उस समय का राजा आनन्द था। पिता काश्यप था। और पुत्र
तो मैं ही था।
१५६. अलीनचित्त जातक
“अलीनचित्त निस्साय ”, यह शास्ता ने जेतवन में विहार करते समय
एक हिम्मत-हारे भिक्षु के बारे म कही।
क. वर्तमान कथा
इसकी कथा ग्यारहवें परिच्छेद (निपात) की सबर जातक¹ म आएगी।
शास्ता ने उस भिक्षु से पूछा—'भिक्षु, क्या तूने सचमुच हिम्मत छोड़
दी?'
“भगवान् ! सचमुच।”
शास्ता ने कहा—'भिक्षु, क्या तूने पूर्व समय में हिम्मत करके मास के
टुकड़े सदृश छोटे से कुमार को बारह योजन के वाराणसी के नगर का राज्य
¹ सबर जातक (४६२)