जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Jataka Kathayen (Authentic Hindi Translation from Pali)
by भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक
Source: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (origin)
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सभी रिश्तेदारो तथा मित्रो आदि ने समझाने की कोशिश की । वे नही समझा
सके । वह वही सूख सूख कर मर गया ।
उसका पिता शरीर का दाह-कर्म आदि कृत्य करके जब शोक कम हुआ तो
शास्ता की वन्दना करने की इच्छा से बहुत सा गन्ध-माला-लेप आदि ले महावन
पहुँच शास्ता की पूजा कर, प्रणाम कर एक ओर बैठा । शास्ता ने पूछा—
“उपासक ! क्यो इन दिनो दिखाई नही देता ?”
उसने वह हाल कहा ।
शास्ता बोले—“उपासक ! तेरा लडका केवल अभी अनधिकार इच्छा
करके विनाश को प्राप्त नही हुआ, पहले भी हुआ है ।”
उपासक के प्रार्थना करने पर शास्ता ने पूर्व जन्म की बात कही—
ख. अतीत कथा
पूर्व काल मे वाराणसी में ब्रह्मदत्त के राज्य करने के समय बोधिसत्त्व
हिमालय-प्रदेश मे सिंह होकर पैदा हुए । उनसे छोटे छ भाई थे और एक बहन
थी । सभी काञ्चन-गुफा में रहते थे ।
उस गुफा से थोडी ही दूर रजत पर्वत पर एक स्फटिक गुफा थी । उसमें
एक सियार रहता था । समय गुजरने पर उन सिंहो के माता पिता मर गए ।
वह अपनी बहन सिंह बच्ची को गुफा में छोड जाते और स्वय शिकार के लिए
बाहर निकल मास ला कर उसे देते । वह सियार उस सिंह बच्ची को देखकर
उस पर आसक्त हो गया । उसके माता पिता जब थे, तब तो उसे अवसर न
मिलता था । अब इन सातो जनों के शिकार के लिए चले जाने पर स्फटिक
गुफा से उतर काञ्चन-गुफा के द्वार पर जा सिंह बच्ची के सामने इस प्रकार
कुछ लौकिक ढंग की गुप्त बातचीत कहता—
‘सिंह की बच्ची ! में भी चौपाया हूँ। तू भी चौपाया है । तू मेरी
भार्या बन । मे तेरा पति बनूंगा । हम मिलकर प्रसन्नता पूर्वक रहेंगे । अब
से तू मेरी प्रेमिका हो जा ।”
वह उसकी बातचीत सुन सोचने लगी—
“यह सियार चौपायो म सबसे निचले दर्जे का निकृष्ट प्राणी है, वैसे ही
जैसे चाण्डाल । हम उत्तम राजकुल के है। यह मुझसे असभ्य अनुचित बात
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