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जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा

स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)

DevanagariHindipublished479 पृष्ठ

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विषय पृष्ठ
१६२. सन्थव जातक .. .. .. .. १८८
[ ब्राह्मण ने घी मिश्रित खीर अग्नि भगवान को पिलाई ।
अग्नि भगवान ने उसकी पर्णकुटी जला डाली । ]
१६३. सुसीम जातक .. .. .. .. १९०
[ सुसीम राजा ने समझा कि उसके पुरोहित का
लड़का न तीनो वेद जानता है न हस्ति-सूत्र । किन्तु यह
सोलह वर्ष का बालक एक ही रात में तक्षशिला से तीनो
वेद और हस्ति-सूत्र सीख आया । ]
१६४. गिज्झ जातक .. .. .. . १९६
[ गृद्धो ने अपनी कृतज्ञता प्रगट करने के लिए लोगो के
वस्त्राभरण उठा उठा कर सेठ को लाकर दिए । ]
१६५. नकुल जातक .. .. .. .. १९९
[ बोधिसत्त्व ने नेवले और सांप की दोस्ती करा दी । ]
१६६. उपसाळ्हक जातक .. .. . .. २०१
[ उपसाळ्हक ब्राह्मण मरने पर ऐसी जगह जलाया
जाना चाहता था जहां पहले कोई न जलाया गया हो ।
लेकिन ऐसी जगह कहां ? ]
१६७. समिद्धि जातक .. .. .. .. २०४
[ देवकन्या ने भिक्षु के सुन्दर शरीर पर आसक्त हो
उसे काम-भोगों का निमन्त्रण दिया । भिक्षु ने बिना काम-
भोगों को भोगे भिक्षु बनने का कारण बताया । ]
१६८. शकुणग्घि जातक .. .. .. .. २०७
[ बटेर ने अपने गोचर स्थान पर रह कर बाज की
भी जान ले ली । ]
१६९. अरक जातक .. .. .. .. २१०
[ मैत्री भावना का माहात्म्य । ]