जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)
Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary
by श्री गुरु नानक देव जी
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थापेआ न जाए कीता न होए ॥
आपे आप निरंजन सोए ॥
जिन सेविआ तेन पाया मान ॥
नानक गावीऐ गुणी निधान ॥
गावीऐ सुणीऐ मन रखीऐ भाओ ॥
दुख परहर सुख घर लै जाए ॥
गुरमुख नादं गुरमुख वेदं गुरमुख रहेआ समाई ॥
गुर ईसर गुर गोरख बरमा गुर पारबती माई ॥
जे हओ जाणा आखा नाही कहणा कथन न जाई ॥
गुरा इक देहे बुझाई ॥
सभना जीआ का इक दाता सो मै विसर न जाई ॥५॥
वह परमात्मा किसी के द्वारा मूर्त रूप में स्थापित नहीं किया जा
सकता, न ही उसे बनाया जा सकता है। वह मायातीत होकर स्वयं
से ही प्रकाशमान है। जिस मानव ने उस ईश्वर का नाम-स्मरण
किया है उसी ने उसके दरबार में सम्मान प्राप्त किया है। श्री गुरु
नानक देव जी का कथन है कि उस गुणों के भण्डार निरंकार की
बंदगी करनी चाहिए। उसका गुणगान करते हुए, प्रशंसा सुनते हुए
अपने हृदय में उसके प्रति श्रद्धा धारण करें। ऐसा करने से दुखों का
नाश होकर घर में सुखों का वास हो जाता है। गुरु के मुँह से
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