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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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करें और शनैः शनैः समय बढ़ाते जायें।

२- केवल एक नथने को बन्द करके दूसरे नथने से लम्बे-लम्बे श्वैस खींचना और छोड़ना, कुछ देर पश्चात् इसी क्रिया को दूसरे नथने से करना।

३- सीधे बैठ कर नासिका को बिना हाथ लगाये दोनों नथनों से एक साथ श्वैस खींचना और छोड़ना।

४- सीधे बैठ कर बाँयें हाथ को कमर के पीछे भूमि पर पंजा खोल कर रखें हाथ का अंगूठा नितम्ब के मध्य रीढ़ की हड्डी के पास लगा दो दाहिने हाथ के अंगूठे से नासिका के दायें नथने को बन्द करके और ठोड़ी को बायें कन्धे के पास तक घुमाकर बायें नथने से लम्बे लम्बे श्वैस खींचें और छोड़ें इसी प्रकार दायी हाथ कमर के पीछे रखकर हाथ का अंगूठा नितम्ब के मध्य रीढ़ की हड्डी के पास लगाकर बायें हाथ के अंगूठे से बायीं नथना बन्द करके और ठोड़ी को दायें कन्धे के पास घुमाकर दायें नथने से लम्बे लम्बे श्वैस खींचें और छोड़ें।

५- सीधे बैठ कर दोनों नथनों से एक साथ सीधा श्वैस न खींच कर उसे समान बराबर के छः टुकड़ों में खींचें और इसी अनुपात के तीन टुकड़ों के समय तक रोकने के पश्चात् उपरोक्त छः टुकड़ों के समान ही छः टुकड़ों में बाहर छोड़ें और उसी अनुपात के तीन टुकड़ों के समय तक बाहर ही रोकें यह एक प्राणायाम हुआ इसी प्रकार पांच प्राणायाम करें और सामर्थानुसार बढ़ाते जायें।

यह पांचों प्रकार के प्राणायाम भक्तिका प्राणायाम ही हैं, यह दोष रहित प्राणायाम हैं, इनके करते रहने में किसी भी प्रकार की हानि पहुँचने की सम्भावना नहीं है। हर प्रकार के प्राणायाम के समय कमर, रीढ़ की हड्डी सीधी रहनी चाहिये और मूलबन्ध बराबर लगा रहना चाहिए मूलबन्ध का अर्थ है गुदा और मूत्रेन्द्रिय को ऊपर खींचे रहना। प्रत्येक प्रणायाम को पहले हल्के-हल्के

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri