इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextमैंने कभी यह नहीं चाहा कि आप वन को जायें। यदि मैंने कभी भी ऐसा विचार हो तो मुझे उतना ही पाप लगे जितना सूर्योदय के पश्चात् सो कर उठने वाले को लगता है। अब आप स्वयं विचार लें कि सूर्योदय के पश्चात् उठने से कितनी हानि होती है। इसलिए शरद् ऋतु में ५।। या ६ बजे और ग्रीष्म ऋतु में ४।। या ५ बजे तक अवश्य ही उठ जाना चाहिए। शय्या से उठकर उक्त वेद मंत्रों द्वारा ईश्वर का ध्यान करने के पश्चात् सर्वप्रथम अपना दाहिना हाथ देखना और ध्यान करना कि प्रभु मेरे इस हाथ से कोई अपयश न हो और मुझे इस हाथ द्वारा धन, ऐश्वर्य और स्वास्थ्य निरोगता प्रदान करो, तदनन्तर दर्पण में अपना मुख देखकर हास और वृद्धि पर दृष्टि डालना चाहिए दर्पण आपको स्पष्ट बता देगा कि आपके स्वास्थ्य में कमी आ रही है अथवा वृद्धि हो रही है। तत् पश्चात् अपनी पत्नी या पुत्र को देखना उचित है।
उषःपान
प्रातःकाल उठकर प्रथम जल पीने का विधान शास्त्र में है इससे मल (पाखाना) खुलकर आता है और उत्साह में वृद्धि होती है। किसी-किसी को प्रातः कालीन शीतल जल लाभ नहीं करता। उनको उचित है कि वे हल्के उष्ण जल में किंचित लवण मिश्रित कर पान करें।
| अम्लसः | प्रसुतीरष्ठी | खावनुदिते | पिवेत। |
|---|---|---|---|
| वात | पित्त | कफान् | जित्वा जीवैर्द्वर्षशतं सुखी॥ |
| अर्शः | शोथग्रहरायो | ज्वर | जठर |
| जराकृच्छ्रमेदो | विकारा। | मूत्राघातात्त्रपित्त | श्रवण |
| मलशिरः | श्रीणिशुलाक्षिरोगाः॥ | ये चान्ये वात | पित्त क्षतज |
| कफकृता | व्याधयः | सन्तिजन्तोः। | तां स्तानभ्यास |
| योगादपहरित | पयः | पीतमन्ते | निशायाः॥ |
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri