इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextगायत्री मन्त्र
ओ३म् भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो
देवस्य धीमहि। धियो योः प्रचोदयात्॥
हे! सर्व रक्षक 'ओ३म्' तुम को बार-बार प्रणाम है।
प्राण प्रिय 'भू' दुःख विनाशक, 'भुवः' तुहारा नाम है।
सत् चित्त 'स्वः' आनन्द कन्द मंगल मूल तुम सुख रूप हो।
हम हैं प्रजा सब आपकी, तुम ही हमारे भूप हो।
माता पिता सविता विधाता, 'देव' दिव्य प्रकाश हो।
हम ग्रहण करते हैं 'वरेण्य', भक्त जन की आस हो।
शुभ गुण-सदन विज्ञान सागर, 'भर्ग' प्रिय भुवनेश हो।
हम हैं उपासक आपके, तुम ज्ञान गम्य गणेश हो।
मानस-भवन में आपका हम, ध्यान नित्य धरते रहें।
प्रेरित करो बुद्धि: हमारी, दुरित सब हरते रहें॥
हो भव्य-भावों से भरा भगवान! यह घर आपका।
निशि दिन, सुमंगल गान हो, दर्शन न होवे पाप का।।
स्व- केवलानन्द जी
जिन परिवारों में स्त्रियाँ नित्य नियमित रूप से झाड़ू लगाते समय, आटा छानते तथा गूँथते समय, भोजन बनाते समय तथा पति, पुत्र, पुत्री आदि परिवारजनों को भोजन परोसते समय गायत्री मन्त्र का जाप करती रहती हैं अर्थात् हर समय गायत्री मन्त्र का मानसिक जाप करती हैं तो उनके परिवार में कभी अमंगल नहीं होता परन्तु वह परिवार सदैव धन-धान्य से पूरित होकर सुख और शान्ति के साथ जीवन-यापन करता हुआ यश को प्राप्त होता है।
यदि आपकी इच्छा है कि हमारा बालक विद्या और बुद्धि में अद्वितीय विद्वान हो तो उसके लिये तीन वर्ष तक गायत्री मन्त्र
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri