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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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यह हृदय रोग पर भी अच्छा लाभ करती है।
१०७-संख्या चूर्ण नं३- संख्याचूर्ण नं१ १०ग्राम, वंशलोचन ३५ग्राम,
चीनी (खाण्ड) ३५ ग्राम सबको खरल में डालकर बारीक
करें।

यह प्रयोग असीम लाभप्रद है, इसमें एक मात्रा में संख्या
१०२५वीं भाग आता है, जो नितान्त हानिरहित है। आमाशय
की दुर्बलता तथा रक्त दोषों में असीम लाभदायक है। यह
भी हृदय की दुर्बलता में लाभप्रद है। यह बच्चों को भी दिया
जा सकता है, बच्चों के लिये १चावल की मात्रा देनी चाहिये।
यह अतिसार, विशुचिका आदि में बहुत उत्तम लाभ करता है।
यह अत्यन्त रक्तवर्धक है।

संख्ये का शोधन- संख्या की डली को एक सप्ताह कले
के मूसल के रस में भिगोने से शुद्ध हो जाता है।

१०८- शुद्ध सफेद संख्या १ग्राम को खरल में डालकर खूब घोंटे।
रात को १५ बादाम की मींग निकालकर पानी में भिगोये, प्रातः
छील कर, एक-एक मींग खरल में डालकर घोंटे। इसी प्रकार
सात दिन तक रात को बादाम की मींग पानी में भिगोकर
अगले दिल छीलकर खरल में डालकर घोंटे अर्थात् १०५ बादाम
की मींगें १ग्राम संख्ये में डालकर घोटनी हैं। जब खूब बारीक
हो जाये तो उसकी एक हजार गोलियाँ बनालें। छाया में
सुखाकर रख लें।

एक गोली नित्य प्रातः भोजन के पश्चात् सेवन करें।
इसके सेवन से शरीर पुष्ट होकर अस्थियाँ सुदृढ़ बनती हैं।
इसके निरन्तर ५अथवा ६ वर्ष तक सेवन से आयुश्य वृद्धि
होती है। यह प्रयोग कफ और वात पर अमृततुल्य है। पित्त
प्रकृति के व्यक्ति इसके साथ पूर्वाकित ठण्डक का चूर्ण एक
ग्राम के साथ प्रयोग करना चाहिये।

१०९- अबलेह- १०ग्राम शिलाजीत, ५०ग्राम दक्षिणी मिर्च, १००ग्राम
इच्छानुसार सन्तान २३० वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri