इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextपीपल बड़ी, १०ग्राम लाजवन्ती, १०ग्राम तुखेंगिरी, १०ग्राम विदारी कन्द, १०ग्राम अजवान इन सबका बारीक चूर्ण करके सबके बराबर मिश्री पीस कर मिलालें। नित्य प्रातः और रात्रि को सोते समय ५-५ ग्राम दूध से सेवन करने से वीर्य में पुष्टता आती है, शुक्रकीट बढ़ते हैं, पस-सैल्स नष्ट होते हैं। शीघ्रपतन का नाश होकर गर्भ-स्थापक वीर्य बन जाता है।
१६-आयुर्वेदिक चाय- ५०ग्राम अर्जुन की छाल, २५ग्राम सौफ, १५ग्राम मुलैठी, ५ग्राम गुलवफशा, १०ग्राम तेजपाता, ५ग्राम लौंग, ५ग्राम दारचीनी, ५ग्राम लालचन्दन, ५ग्राम सौंद, ५ग्राम गाजर्वा। इन सबको दरदरा कूटकर तैयार करलें, एक चम्मच पानी में पकाकर दूध मिलाकर सेवन करें उत्तम हो।
१७-शरीर के तिल मस्से ठीक करना- किशोर गुल ११गोली प्रातः ११गोली सायं भोजन के बाद अभ्यारिष्ट के साथ लेने से ठीक हो जाते हैं।
१८-ग्वारपाठा - इसे घीग्वार भी कहते हैं। अंग्रेजी में एलोबेरा कहते हैं। इसके गुदे को सिर पर मलने से रूसी नष्ट हो जाती है, बाल कोमल हो जाते हैं। इसके गुदे को चेहरे पर लगाने से मुहासे, चेहरे की झुर्रियाँ आदि नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ मुलतानी मिट्टी पीसकर, मिलाकर लगाने से अच्छा परिणाम आता है। इसे जले पर तुरन्त लगाने से छाला नहीं पड़ता। इसके लड्डू बनाकर सेवन करने से जाड़ों में अच्छा रहता है।
१९-ठण्डक का योग- १०ग्राम वंशलोचन, १०ग्राम हरी इलायची, १०ग्राम सफेद चन्दन चूर्ण, १०ग्राम धनियाँ, १०ग्राम कहवा, १०ग्राम जहरमोरा, ५ग्राम पत्थरबेर, ५ग्राम अकौक, २।ग्राम मूंगा, ५०नग चान्दी के वर्क। इन सबको बारीक कूटकर अथवा खरल करके रख लें। यह औषधि पित्त को रोगों में रसायन है। हृदय की निर्वलता, पिपासा, घबराहट आदि में
इच्छानुसार सन्तान २२७ वीरेन्द्र गुप्तः
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