इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in context३-कफ विकार- माता का दूध अधिक सफेद, अधिक मीठा और अधिक गाढ़ा अथवा चिकना हो, जल में डालने से नीचे बैठ जाय और उसमें घी या तेल की सी गन्ध आती हो, तो कफ का विकार समझना चाहिए।
ऐसा दूध पीने से बच्चे को खाँसी, जुकाम, आँव, बदहज्मी, दूध डालना, लार बहना और अधिक नींद आना आदि रोग होते हैं।
ऐसी दशा में माता को हरड, बहेड़ा, आँवला, मोथा, चिरायता और कूटकी समान भाग का क्वाथ पिलावें।
यदि किसी कारण यह ज्ञात न हो सके कि दूध में कौन सा विकार है और बच्चा रोगी और निर्बल होता जाता हो तो निम्नलिखित क्वाथ पिलावें। उससे सर्व प्रकार के दोष दूर होकर माता का दूध शुद्ध हो जाता है।
पाठा (जलजमनी) कूटकी, साँठ, देवदारू, मुर्वा, मोथा, गिलोय, इन्द्र जी मीठा, चिरायता, सारिवा। इनमें से जितनी वस्तुएँ मिल सकें समान भाग लेकर क्वाथ बनाकर प्रातः सायं पिलावें।
दूध सुखाना
यदि दुर्भाग्य वश बच्चे की मृत्यु हो गई हो तो ऐसी दशा में जब माता के दूध बढ़ जाने से स्तनों में वेदना होने लगती है तो दूध को सुखा देना ही उत्तम होता है। इसके लिए मसूर की दाल को कच्ची (जो पकाई न गई हो) जल में पीस कर स्तनों पर गाढ़ा-गाढ़ा लेप कर देने से दूध सूख जाता है। इस क्रिया के एक बार करने से दूध सूख जायगा।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri