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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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रति समय बच्चे को स्तन पान कराने से हानियाँ

जब समागम समय बच्चा जागने या रोने लगता है तो उस समय समागम के आनन्द में बाधा न पड़े इसलिए माता बच्चे के मुख में स्तन दे देती है, जिससे बालक चुप हो जाय और इन्द्रिय आनन्द भंग न हो।

पाठको! जिस समय स्त्री और पुरुष दोनों कामावेश में होते हैं उस समय उनके सारे शरीर का रक्त उबल पड़ता है। जिसके कारण माता के दूध में पित्त विकार उत्पन्न हो जाता है, ऐसा दूध बच्चे को देना मानों अपने ही हाथों बच्चे को काल के गाल में देना है। अपने इन्द्रिय सुख के कारण अपने आत्मज की बलि चढ़ा देना कहीं की बुद्धिमत्ता है। समागम की भावना, समागम समय तथा समागम के एक घन्टे पश्चात् तक अर्थात् जब तक समागम के पश्चात् शरीर शान्त और सम्यक न हो जाय तब तक बच्चे को स्तन पान कराना मानों विष देना है।

इस समय में बच्चे को स्तन पान कराने से १० प्रतिशत रोग उत्पन्न हो जाते हैं। और बालक को उन रोगों का सामना करना कठिन हो जाता है। जिसके फल स्वरूप वह या तो अपनी जीवन यात्रा को यहीं समाप्त कर देता है या रोगी होकर सदैव के लिए निर्बल हो जाता है। रोग जैसे सूखा, पसली का चलना, हरे पीले दस्त, दूध डालना, निमोनिया आदि अनेक रोग हैं जो बच्चे में उत्पन्न हो जाते हैं। आपने देखा होगा कि अक्सर बच्चों को घोर गर्मियों की ऋतु में निमोनिया हो जाता है। जिसका मुख्य कारण समागम समय या समागम के पश्चात् तत्काल बच्चे को स्तन पान करा देना है। इसलिए समागम की समाप्ति के एक घन्टे

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri