Skip to content
SarvaKosh
इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

Page 125 of 250

Read in context
Page 125

इसी प्रकार यदि स्त्री ने पुत्र को जन्म दिया तो पुत्र का जन्म होने के पश्चात् जो प्रथम मासिक धर्म होगा वह मास रजः प्रधान मास होगा। इसके पश्चात् जब अगला मासिक धर्म होगा तो वह रजः न्यून मास होगा। इसी प्रकार आगे गणना करें।

पुत्र का जन्म होने के पश्चात्-

| रजः प्रधान मास | रजः न्यून मास
---|---|---
प्रथम ' मासिक धर्म | (१) दिनांक..... | (२) दिनांक.....
| (३) दिनांक..... | (४) दिनांक.....
| (५) दिनांक..... | (६) दिनांक.....

जिन पुरुषों में सामान्य स्थिति में स्त्री के रजः से वीर्य की मात्रा न्यून है तो उन्हें चाहिए कि वह रजः न्यून मास में युगम ६, ८, १०, १२, १४, १६ रात्रियों में ही गर्भाधान करें तो निश्चय ही उनको पुत्र लाभ होगा।

जिस बच्चे का जन्म हुआ हो उसी के अनुरूप एक चार्ट उपरोक्त प्रकार का बना लेना चाहिए। आपको इस चार्ट की सहायता से रजः न्युनाधिक मास का पता बड़ी ही सुगमता से चलता रहेगा। आपको अपनी रुचि के मास को निकालने में किसी भी कठिनाई का अनुभव नहीं होगा।

शमीभरवत्थ आरूढस्तत्र पुंसुवन् कृतम्।

तद् वै पुत्रस्य वेदनं तत् स्त्रीष्वा भरामसि॥

अथर्ववेद ६/११/१

अर्थ- शमी (जन्ड) नामक वृक्ष के ऊपर उगा हुआ पीपल के (पचांग का चूर्ण) पुमान् पुत्र उत्पन्न करने को औषधि है। इसी से पुत्र लाभ होता है और इसी औषधि को सेवन से उत्पन्न वीर्य को आधान करना चाहिये।

इसके सेवन से पुरुष का वीर्य पुष्ट होकर गर्भाधान क्रिया समय अधिक मात्रा में स्वलिप्त होकर पुत्र को ही जन्म देगा तथा पीपल के ऊपर उगा हुआ शमी पुत्री उत्पन्न करने की औषधि है।

इच्छानुसार सन्तान

११९

वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri