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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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मूल कारण है विपरीत प्रकृति वाले नक्षत्रों में गर्भाधान संस्कार का होना।

जिस दम्पति की इच्छा हो कि हमारे परिवार में सदैव सुख और शान्ति का वातावरण रहे तो उन्हें उचित है कि वह अपने नाम नक्षत्र के अनुकूल प्रकृति वाले ही नक्षत्रों में गर्भाधान संस्कार करें।

नक्षत्र २८ होते हैं। अभिजित नक्षत्र उत्तराषाढ़ के पश्चात् आता है जिसका समय अति न्यून है, इसी कारण उसकी गणना कम होती है। शेष २७ नक्षत्रों के अनुकूल प्रतिकूल प्रकृति के अनुसार तीन भागों में बाँटा गया है। अपने नाम नक्षत्र वाली पत्ति के नक्षत्रों में ही गर्भाधान होने से परिवार में कभी किसी में प्रतिकूलता उत्पन्न नहीं होगा।

प्रथम पत्तिद्वितीय पत्तितृतीय पत्ति
१. अश्वनि१. भरणां१. कृत्तिका
२. मृगशिरा२. रोहिणां२. अश्लेषा
३. पुनर्वसु३. आद्रा३. मघा
४. पुष्य४. पूर्वाफाल्गुनी४. चित्रा
५. हस्त५. उत्तराफाल्गुनी५. विशाखा
६. स्वाती६. पूर्वाषाढ़६. ज्येष्ठा
७. अनुराधा७. उत्तराषाढ़७. मूल
८. श्रवण८. पूर्वाभाद्रपद८. धनिष्ठा
९. रेवती९. उत्तराभाद्रपद९. शतभिष

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इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्त:

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri