Skip to content
SarvaKosh
इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

Page 111 of 250

Read in context
Page 111

वैद्य होकर ऐसी बात कह रहे हैं? यह रोग है-भाग्य नहीं। वैद्य जी- आप ही कुछ बताइये? पण्डित जी अबकी बार जब गर्भ स्थित हो तब आप मुझे बताना। कुछ समय को परघात् गर्भ स्थित हुआ, वैद्य जी पण्डित गोपीनाथ जी को घर पहुँचे। पंडित जी ने पेड़ की डाल निकाल कर दी और कहा- उसमें से चने बराबर तोड़ कर नित्य प्रातः काल गर्भिणी मुख मे डाल कर चूसती रहे। इसका सेवन प्रसव समय तक किया जायगा। वैद्य जी ने ऐसा ही किया और समय आने पर पुत्र ने जन्म लिया। वैद्य जी ने पंडित गोपीनाथ जी का धन्यवाद किया और इस प्रयोग को जानना चाह। पंडित जी ने बताया यह प्रयोग हमारे बाबा श्री पंडित जानकी दास जी से प्राप्त हुआ और आज तक कभी असफल नहीं हुआ।

प्रयोग- जिस शनिवार के दिन पुष्प नक्षत्र हो उसी दिन काले सिरस के पेड़ की सूखी डाल हाथ से छुटा कर रख लें ध्यान रहे किसी धातु से नहीं छुटानी चाहिए।


शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष का

भ्रम निवारण

चन्द्र मास के दो पक्ष होते हैं, अमावस्या के पश्चात् बगले दिन से प्रारम्भ होने वाले पक्ष को शुक्ल पक्ष कहते हैं इसमें चन्द्रमा वृद्धि को प्राप्त होता है और पौर्णमासी के दिन चन्द्रमा पूर्ण हो जाता है इसके अगले दिन से चन्द्रमा का क्षय होने लगता है, इस पक्ष को कृष्ण पक्ष कहते हैं।

स्त्री के मासिक धर्म के भी दो पक्ष होते हैं पहला पक्ष मासिक धर्म को प्रारम्भ होने के दिन से गिना जाता है इसे शुक्ल पक्ष कहते हैं, इस पक्ष के सोलह दिनों में ही गर्भ स्थित होता है इसके पश्चात् १७वें दिन से कृष्ण पक्ष प्रारम्भ हो जाता है और

इच्छानुसार सन्तान

१०५

वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri