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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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करेंगे, जो आगे चलकर ब्रह्मचर्य के खण्डित होने का कारण भी बन जाते हैं। इसलिए यह कार्य बच्चे जिस कमरे में सो रहे हों उसमें न करें। आप इस भ्रम में न रहें कि बच्चे सो रहे हैं। उनकी किसी भी समय नींद उचट सकती है और वह उस अवस्था को देख सकते हैं। इसलिए यह सब कार्य अन्य एकात्म कमरे में ही हो। जहाँ इस प्रकार की सावधानी नहीं रखी जाती वहाँ पर बच्चे बड़े होकर आपस में भाई-बहिन भी वही कृत्य करने लगते हैं।


रहस्यमय तथ्य

जिस प्रकार पुरुषों को सोते समय स्वप्नदोष हो जाता है, उसी प्रकार स्त्रियों को भी स्वप्नदोष होता है। स्वप्नदोष में पुरुषों का वीर्य और स्त्रियों का रजः स्खलित हो जाता है। जब स्वप्नदोष में स्खलित स्त्री का रजः बाहर न आकर किसी भी कारण से अन्दर प्रवेश कर जाता है तो इससे उस स्त्री को गर्भ स्थित हो जाता है। ऐसे गर्भ को मूक अथवा प्रेत गर्भ कहते हैं और इस अवस्था में उक्त स्त्री को नौ मास तक सारे वही लक्षण उपस्थित हो जाते हैं जो गर्भित स्त्री के होते हैं। समय आने पर प्रसव भी उसी प्रकार होता है, परन्तु उससे उत्पन्न वस्तु अंग-प्रत्यंगों से रहित केवल एक मास पिण्ड मात्र ही होता है। इसे मूक गर्भ इसी कारण कहते हैं कि इसमें आकृति और चेतना का अभाव होता है।

१- मुरादाबाद मौ- साहू में श्री गंगा सहाय जी रहते थे, उनके कोई सन्तान नहीं थी, खिंची अवस्था में अनायास उनकी पत्नी गर्भवती हो गई, नौ मास तक सारे लक्षण सही रहे, समय आने पर महिला चिकित्सालय में प्रसव हुआ परन्तु उत्पन्न बालक

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri