हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)
Hitopadesha (with Hindi Translation)
by नारायण पण्डित
Source: हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित) · चौखम्बा विद्याभवन · 2017 (origin)
Page 246 of 302
Read in context२२६ हितोपदेशः [ संधिः १५-
कथा ८
[ देवशर्मा नामक ब्राह्मण और कुम्हारकी कहानी ८ ]
'अस्ति देवीकोटनाम्नि नगरे देवशर्मा नाम ब्राह्मणः । तेन महा-
विषुवसंक्रान्त्यां सक्तुपूर्णशराव एकः प्राप्तः । तमादायासौ कुम्भ-
कारस्य भाण्डपूर्णमण्डपैकदेशे रौद्रेणाकुलितः सुप्तः । ततः सक्तु-
रक्षार्थं हस्ते दण्डमेकमादायाचिन्तयत्—'यद्यहं सक्तुशरावं
विक्रीय दश कपर्दकान् प्राप्स्यामि तदाऽत्रैव तैः कपर्दकैर्घटशरावा-
दिकमुपक्रीयानेकधावृद्धैस्तद्धनैः पुनः पुनः पूगवस्त्रादिकमुपक्रीय
विक्रीय लक्षसंख्यानि धनानि कृत्वा विवाहचतुष्टयं करिष्यामि ।
अनन्तरं तासु सपत्नीषु रूपयौवनवती या तस्यामधिकानुरागं
करिष्यामि । सपत्न्यो यदा द्वन्द्वं करिष्यन्ति तदा कोपाकुलोऽहं
ता लगुडेन ताडयिष्यामि' इत्यभिधाय लगुडः क्षिप्तः । तेन सक्तु-
शरावश्चूर्णितो भाण्डानि च बहूनि भग्नानि । ततस्तेन शब्देनाग-
तेन कुम्भकारेण तथाविधानि भाण्डान्यवलोक्य ब्राह्मणस्तिरस्कृतो
मण्डपाद्बहिःकृतश्च । अतोऽहं ब्रवीमि—"अनागतवतीं चिन्ताम्"
इत्यादि ॥' ततो राजा रहसि गृध्रमुवाच—'तात ! यथा कर्तव्यं
तथोपदिश ।'
'देवीकोट नाम एक नगरमें देवशर्मा नाम ब्राह्मण रहता था । उसने मेषकी
संक्रान्ति पर सत्तूसे भरा एक सकोरा पाया । उसको ला कर वह कुम्हारके बर्त-
नोंसे भरे हुए अवेकी एक ओर गरमीके कारण सो गया । फिर सत्तूकी रख-
वालीके लिये हाथमें एक लकड़ी ला कर सोचने लगा कि-'जो मैं सत्तूके सकोरे-
को बेच कर दस कौड़ी पाऊंगा तो यहाँ ही उन कौड़ियोंसे घड़े, सकोरे आदि
मोल ले कर अनेक रीतिसे बढ़ाये हुए उस धनसे बार बार सुपारी कपड़े आदि
मोल ले कर और बेच कर लाखों रुपयेका धन इकट्ठा करके चार विवाह करूँगा ।
फिर उन स्त्रियोंमें जो रूपरंगमें अच्छी होगी उसी पर अधिक स्नेह करूँगा,
और सौतें जब लड़ाई करेंगी तब क्रोधसे उखता कर मैं उन्हें लकड़ीसे मारूँगा—
यह कह कर लकड़ी फेंकी । उससे सत्तूका सकोरा चूर चूर हो गया और बहुतसे
बर्तन भी फूट गये । फिर उस शब्दको सुन कुम्हार आया। उसने वैसे फूटे टूटे
बर्तनोंको देख कर ब्राह्मणका तिरस्कार किया और अवेसे बाहर निकाल दिया !
इसलिये मैं कहता हूँ—"विना आई चिंताको" इत्यादि ।' फिर राजा एकांतमें
गिद्धसे बोला-'प्यारे ! जो करना हो सो कहो ।