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हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)

हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)

by नारायण पण्डित

Source: हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित) · चौखम्बा विद्याभवन · 2017 (origin)

DevanagariHindipublished302 pages

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-२१६ ] मित्रलाभकी प्रशस्ति ८३-
अपरमपीदमस्तु—
मित्रं प्राप्नुत सज्जना जनपदैर्लक्ष्मीः समालम्ब्यतां
भूपालाः परिपालयन्तु वसुधां शश्वत्स्वधर्मे स्थिताः ।
आस्तां मानसतुष्टये सुकृतिनां नीतिर्नवोढेव वः
कल्याणं कुरुतां जनस्य भगवांश्चन्द्रार्धचूडामणिः'॥२१६॥
इति हितोपदेशे मित्रलाभो नाम प्रथमः कथासंग्रहः समाप्तः ।
यह औरभी होय—सज्जन लोग मित्रको पावें, नगरनिवासी लक्ष्मीको पावें,
राजा लोग सदा अपने धर्ममें रह कर पृथ्वीका रक्षण करें, आपकी नीति नव-
यौवना स्त्रीके समान पण्डितोंके चित्तको प्रसन्न करें और भगवान् महादेवजी
आपका कल्याण करें ॥ २१६ ॥
पं० रामेश्वरभट्टका किया हुआ हितोपदेश ग्रंथके मित्रलाभ नामक पहले
अध्यायका भाषा अनुवाद समाप्त हुआ. शुभम्.