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गोरक्षशतकम् (गुरु गोरखनाथ - षडङ्ग हठयोग, कुण्डलिनी एवं प्राणायाम विधान सटीक)

Goraksha Shatakam of Guru Gorakhnath with Commentary

by गुरु गोरखनाथ (टीकाकार: पं. मोतीलाल खद्दर शास्त्री)

DevanagariHindipublished45 pages

प्रारंभिक पृष्ठ एवं मंगलाचरण

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गोरक्षनाथ प्रणीतः
गोरक्ष शतकम्
(हिन्दी अनुवाद सहित)
सहस्रार
आज्ञा
विशुद्ध
अनाहत
मणिपूर
स्वाधिष्ठान
मूलाधार
अनुवादक : डॉ. मोतीलाल खड्डर शास्त्री (मास्टरजी)
प्रकाशक : श्री पीताम्बरा पीठ, दतिया ( म.प्र. )

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शिवअवतार श्री गुरुगोरक्षनाथ
शिव अवतार श्री गुरू गोरखनाथ

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ॐ
ॐ श्री परमगुरूवे गोरक्षनाथाय नमः
गोरक्षनाथ प्रणीतः
गोरक्षशतकम्
★
(हिन्दी अनुवाद सहित)
卐 अनुवादक 卐
मोतीलाल खड्डुर शास्त्री (मास्टरजी)
:: प्रकाशक ::
श्री पीताम्बरापीठ, दतिया - ४७५६६१ (म.प्र.)

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ॐ
प्रकाशक : श्री पीताम्बरा पीठ
दतिया (म.प्र.)
संस्करण : प्रथम संस्करण (१००० प्रतियां)
२८ सितम्बर सन् २०११
शारदीय नवरात्र संवत् : २०६८
मूल्य : पच्चीस रूपये मात्र (२५/-)
मुद्रक : शिवशक्ति प्रेस प्रा. लि.
बैद्यनाथ आयुर्वेद भवन,
ग्रेट नाग रोड, नागपुर-९
© सर्वाधिकार प्रकाशकाधीन

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जगज्जननी भगवती पीताम्बरा माता
पीताम्बरां विघ्नहरां प्रणम्य,
गोरक्षनाथं सिद्धेशमीडे ।
ययोः कृपातो ग्रथितो सुलेखः
ताभ्यां सश्रद्धोऽयं समर्पयेऽहम्
योगैक गम्यां निहितात्मविद्यां
ज्ञातुं न शक्तः सहसा वुधोऽपि
तथापि मन्देन कृतः प्रयासः
सतां सदाशंसनमातनोतु ।।

  • अनुवादकः
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प्रकाशकीय
राष्ट्रगुरु श्री पीताम्बरा-पीठाधीश्वर पूज्यपाद श्री स्वामीजी महाराज
के शुभाशीर्वाद एवं जगज्जननी भगवती पीताम्बरामाता, की असीम अनुकम्पा
से श्री गोरक्षनाथ प्रणीत 'गोरक्ष शतकम्' हिन्दी अनुवाद के साथ प्रकाशित
कर पीताम्बरापीठ अत्यधिक आनन्द का अनुभव कर रही है।
प्रस्तुत ग्रन्थ गोरक्ष शतकम् के सौ श्लोकों में हठयोग के गंभीर विषयों
को श्री गोरखनाथ ने सरल तथा सहजरूप में अभिव्यक्त किया है वैसा ही सुन्दर
अनुवाद पूज्यपाद श्री स्वामीजी महाराज के कृपा पात्र एवं पीठ के अनन्य सेवक
डॉ. श्री मोतीलाल खड्डर शास्त्री (मास्टरजी) द्वारा किया गया है, जो हृदयहारी है।
आशा है इस ग्रन्थ के प्रकाशन से न केवल विद्वान पाठकों को संतोष
होगा अपितु योग साधकों का भी पथ प्रदर्शन होगा।
श्रीमती रेणु शर्मा
मंत्री
श्री पीताम्बरा पीठ
दतिया (म.प्र.)
शारदीय नवरात्र
२८ सितम्बर २०११