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गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)

गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)

Gopatha Brahmana with Hindi Bhashya by Pt. Kshemkarandas Trivedi

by महर्षि गोपथ / पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी

Source: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · 1950 (origin)

DevanagariSanskritpublished600 pages

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( ३१ )
कण्डिका विषय पृष्ठ
११-आख्यायिका-एकाह यज्ञ के तृतीय सवन में से सायंकाल में
घुसे हुये असुर लोग इन्द्र, अग्नि, वरुण, बृहस्पति और
विष्णु पांच देवताओं अथवा वाक् आदि पांच इन्द्रियों करके
निकाले गये ... ... ... ... ४३३
१२-आख्यायिका-प्रजापति पांच प्राणों से पांच देवताओं को उत्पन्न
करता है और पांच देवता स्तुति किये जाते हैं ... ४३५
१३-उक्थ में दो इन्द्र और अग्नि की स्तुति रहते हुये बहुत देवताओं
की स्तुति का विचार ... ... .. ४३६
१४-तीन ऋत्विजों के अलग अलग उक्थ और दो दो देवता वाले
उक्थ हैं ... ... ... ४३६
१५-एकाह यज्ञ के तृतीयसवन के उक्थ में मैत्रावरुण ऋत्विज् के मन्त्र ... ४३७
१६-एकाह यज्ञ के तृतीय सवन के उक्थ में ब्राह्मणाच्छंसी ऋत्विज् के
मन्त्र ... ... ... ... ... ४४१
१७-एकाह यज्ञ के तृतीय सवन के उक्थ में अच्छावाक ऋत्विज् के
मन्त्र ... ... ... ... ... ४४५
१८-एकाह यज्ञ के तृतीय सवन में ( शंशिसावोम् ) इस मन्त्र को चार
चार बार बोलें ... ... ... ... ४४६
१६-एकाह यज्ञ में षोडशी शब्द की व्याख्या ... ... ४५१
प्रपाठक ५ ॥
१-आख्यायिका-अतिरात्र यज्ञ में से इन्द्र और छन्दों ने तीन पर्यायों
में असुरों को निकाल दिया ... ... ... ४५३
२-अतिरात्र यज्ञ के तीन पर्यायों में तीन प्रकार से स्तुति ... ४५५
३-अतिरात्र यज्ञ में पवमान आदि स्तोत्रों का विचार ... ... ४५६
४-यज्ञ का मनुष्य के अङ्गों और ऋत्विजों का प्राणों आदि के दृष्टान्त
से वर्णन ... ... ... ... ४६१
५-यज्ञ के पर्यायों में स्तोत्रों और शस्त्रों के प्रयोग ... ... ४६३
६-आख्यायिका-त्वष्टा का इन्द्र से सोमरस छीनना और सौत्रामणी
इष्टि ... ... ... ... ४६५
७-साम सब वेदों का रस है, सौत्रामणी यज्ञ में सामगान ... ४६७
८-आख्यायिका-वाजपेय यज्ञ का वर्णन ... .. ४६६
६-आख्यायिका-आप्तोर्याम यज्ञ का वर्णन ... ... ४७३
१०-आप्तोर्याम यज्ञ का अधिक वर्णन ... ... ... ४७५
११-अनेकाहिक वा अहीन अर्थात् अनेक दिनों में होने वाले यज्ञ का
वर्णन ... ... ... ... ४७७
१२-अहीन अहर्गण यज्ञ में आरम्भणीया ऋचाओं का वर्णन ... ४७८