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गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)

गोपथ ब्राह्मण (अथर्ववेद - क्षेमकरणदास त्रिवेदी हिन्दी भाष्य)

Gopatha Brahmana with Hindi Bhashya by Pt. Kshemkarandas Trivedi

by महर्षि गोपथ / पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी

Source: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान · 1950 (origin)

DevanagariSanskritpublished600 pages

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( २८ )
कण्डिका विषय पृष्ठ
४—यज्ञ के विघ्नों का नाश और यज्ञ के आरम्भ का विधान ... २६६
५—पौर्णमासी और अमावस को दक्षिणा के स्थान में ओदन का
दान ... ... ... ... २७१
६—यज्ञ में दो प्रकार के देवता आते हैं एक सोमपा दूसरे असोमपा
अथवा एक हुताद और दूसरे अहुताद, उनका वर्णन ... २७२
७—देवासुर संग्राम में प्रजापति द्वारा ओदन के विभाग से देवों
की जीत ... ... ... ... २७४
८--दर्श पौर्णमास यज्ञ के साथ ही सोम यज्ञ करने और यज्ञ करनै
वालों की उच्चदशा का वर्णन ... ... " २७५
६—चन्द्रमा के उदय होने के पीछे हवि देने का विधान ... २७६
१०– पूर्व और उत्तर पूर्णमासी और अमावास्या का विचार ... २७७
११–दोनों पौर्णमासी और अमावस में से एक-एक ही यज्ञ के
आरम्भ और समाप्ति के लिये रहे ... " २७६
१२--दर्श पूर्णमास यज्ञ पर अग्नि और विष्णु तथा सरस्वती और
सरस्वान् को चरु ... ... ... २८०
१३–मार्गकर्त्ता अग्नि के लिये अष्टाकपाल चरु ... ... २८१
१४--व्रतपालक अग्नि के लिये अष्टाकपाल चरु, और व्रत में स्त्रीगमन
और मांसभक्षण का निषेध ... ... ... २८१
१५--व्रतपोषक अग्नि के लिये अष्टाकपाल चरु ... ... २८२
१६--जिसके पिता, पितामह ने सोमपान नहीं किया, वह सोमयाग
करे ... ... ' ... ... २८३
१७—ओषधियों [अन्न आदि पदार्थों] के पकने पर इन्द्र-अग्नि विश्वे-
देवा और सोम के लिये चरु के विषय में कथा ... ... २८४
१८--अप्रतिरथ नाम सूक्त [युद्ध यात्रा के राग] के प्रयोग की कथा ... २८६
१६–चातुर्मास यज्ञ फाल्गुनी पूर्णमासी से करने होते हैं ... २८८
२०--अग्नि और सोम के साथ दूसरे देवताओं के यज्ञ ... २६०
२१--प्रजापति के प्रजायें उत्पन्न और वरुण को प्रसन्न करने की कथा ... २६२
२२-इन्द्र-अग्नि, वरुण आदि के लिये हवि ... ... २६३
२३–इन्द्र, अग्नि और मरुत् देवताओं के लिये हवि ... ... २६५
२४--पितरों के लिये हवि .. ... ... ... २६७
२५--पितृयज्ञ के साथ देवयज्ञ आदि का विधान ... ... २९६
२६—तेरहवें महीने और शुनासीर यज्ञ के साथ अग्नि, वायु, सूर्य,
संवत्सर और चातुर्मास्यों का वर्णन ... ... ३०२