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गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण

Garuda Purana

by महर्षि वेदव्यास

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DevanagariHindipublished634 pages

Page 68 of 634

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Page 68
५८संक्षिप्त गरुडपुराण[ आचार-

सुदर्शनदेव विष्णुका ध्यान करे। हे महादेव! उसके बाद मण्डलमें शङ्ख, चक्र, गदा तथा पद्म धारण करनेवाले, सौम्य आकृतिवाले, किरीटी भगवान् विष्णुदेवका आवाहन करके गन्ध, पुष्प, धूप, दीप आदि विविध उपचारोंसे पूजा करे।

पूजाके अन्तमें मूल मन्त्रका १०८ बार जप करे। हे रुद्र! जो इस प्रकार सुदर्शनचक्रका उत्तम पूजन करता है, वह इस लोकमें समस्त रोगोंसे विमुक्त होकर विष्णुलोकको प्राप्त करता है। मन्त्र-जपके पश्चात् सभी व्याधियोंको विनष्ट करनेवाले इस स्तोत्रका पाठ करना चाहिये—

नमः सुदर्शनायैव सहस्रादित्यवर्चसे ॥
ज्वालामालाप्रदीप्ताय सहस्राराय चक्षुषे ।
सर्वदुष्टविनाशाय सर्वपातकमर्दिने ॥
सुचक्राय विचक्राय सर्वमन्त्रविभेदिने ।
प्रसवित्रे जगद्धात्रे जगद्विध्वंसिने नमः ॥
पालनार्थाय लोकानां दुष्टासुरविनाशिने ।
उग्राय चैव सौम्याय चण्डाय च नमो नमः ॥
नमश्चक्षुःस्वरूपाय संसारभयभेदिने ।
मायापञ्जरभेत्रे च शिवाय च नमो नमः ॥
ग्रहातिग्रहरूपाय ग्रहाणां पतये नमः ।
कालाय मृत्यवे चैव भीमाय च नमो नमः ॥
भक्तानुग्रहदात्रे च भक्तगोप्त्रे नमो नमः ।
विष्णुरूपाय शान्ताय चायुधानां धराय च ॥
विष्णुशस्त्राय चक्राय नमो भूयो नमो नमः ।
इति स्तोत्रं महत्पुण्यं चक्रस्य तव कीर्तितम् ॥
यः पठेत् परया भक्त्या विष्णुलोकं स गच्छति ।
चक्रपूजाविधिं यश्च पठेद्रुद्र जितेन्द्रियः ।
स पापं भस्मसात्कृत्वा विष्णुलोकाय कल्पते ॥
(३३। ८-१६)

सहस्रों सूर्यके समान तेजःसम्पन्न सुदर्शनचक्रके लिये नमस्कार है। तेजस्वी किरणोंकी मालाओंसे प्रदीप्त हजारों अरे (चक्रके अवयव)-वाले, नेत्रस्वरूप, सर्वदुष्टविनाशक तथा सभी प्रकारके पापोंको नष्ट करनेवाले आपको नमन है। सुचक्र तथा विचक्र नामधारी, सम्पूर्ण मन्त्रका भेदन करनेवाले, जगत्‌की सृष्टि करनेवाले, पालन-पोषण करनेवाले एवं जगत्‌का संहार करनेवाले हे सुदर्शनचक्र! आपको नमस्कार है। (संसारकी रक्षा करनेके लिये) देवताओंका कल्याण करनेवाले, दुष्ट राक्षसोंका विनाश करनेवाले, दुष्टोंका संहार करनेके लिये उग्र-स्वरूप एवं प्रचण्ड-स्वरूप और सज्जनोंके लिये सौम्य-स्वरूप धारण करनेवाले आपको बारम्बार नमस्कार है। जगत्‌के लिये नेत्रस्वरूप संसारभयको काटनेवाले मायारूपी पिंजड़ेका भेदन करनेवाले, कल्याणकारी सुदर्शनचक्रको नमस्कार है। ग्रह एवं अतिग्रहरूप, ग्रहपति, कालस्वरूप, मृत्युस्वरूप, पापात्माओंके लिये महाभयंकर आपके लिये बार-बार नमन है। भक्तोंपर कृपा करनेवाले, उनके अभिरक्षक, विष्णुस्वरूप, शान्तस्वभाव, समस्त आयुधोंकी शक्तिको अपनेमें धारणकर स्थित रहनेवाले विष्णुके शस्त्रभूत हे सुदर्शनचक्र! आपके लिये बारम्बार नमस्कार है।

हे शङ्कर! सुदर्शनचक्रके इस महत्पुण्यशाली स्तोत्रका जो मनुष्य परम भक्तिसे पाठ करता है, वह विष्णुलोकको प्राप्त करता है। (अध्याय ३३)


भगवान् हयग्रीवके पूजनकी विधि

रुद्रने कहा— हे हृषीकेश! हे गदाधर! आप पुनः देवार्चनविधिको बतायें। आपके द्वारा बार-बार देव-पूजनविधिको सुनकर भी मुझे तृप्ति नहीं हो रही है।

श्रीहरिने कहा— हे रुद्र! अब मैं हयग्रीव नामके देवके पूजनविधानको कहता हूँ, आप सुनें। उसके करनेसे जगत्‌के स्वामी भगवान् विष्णु अत्यन्त संतुष्ट हो जायँगे।