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गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण

Garuda Purana

by महर्षि वेदव्यास

DevanagariHindipublished634 pages

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२२ संक्षिप्त गरुडपुराण [ आचार-

लवण-समुद्रकी पुत्री सामुद्रीके साथ विवाह किया। उस प्राचीनबर्हिसे सामुद्रीने दस पुत्रोंको जन्म दिया। ये सभी प्राचेतस नामवाले धनुर्वेदमें निष्णात हुए। धर्माचरणमें निरत रहते हुए इन लोगोंने दस हजार वर्षोंतक जलमें निमग्न होकर अत्यन्त कठिन तपस्या की। (तपस्याके प्रभावसे) प्रजापतिका पद प्राप्त करनेवाले उन तपस्वियोंका विवाह मारिषा नामक कन्यासे हुआ।

शिवके शापसे ग्रस्त दक्षने इसी मारिषाके गर्भसे पुनः जन्म ग्रहण किया। दक्षने सबसे पहले चार प्रकारकी मानस प्रजाओंकी सृष्टि की, किंतु महादेवके शापसे उन मानस संतानोंकी अभिवृद्धि नहीं हुई। अतः उन प्रजापतिने 'स्त्री-पुरुष'के संयोगसे होनेवाली मैथुनी सृष्टिकी इच्छा की।

इसके बाद दक्षने प्रजापति वीरणकी पुत्री असिक्नीके साथ विवाह किया। इस असिक्नीके गर्भसे उन दक्षके हजार पुत्र उत्पन्न हुए। नारदके उपदेशसे वे सभी पृथिवीकी अन्तिम सीमाको जाननेके लिये निकल पड़े, किंतु पुनः वापस नहीं आये।

हे हर! इस प्रकार उन हजार पुत्रोंके नष्ट हो जानेपर दक्षने पुनः हजार पुत्रोंको जन्म दिया। वे सभी 'शबलाश्व' नामसे प्रसिद्ध हुए। उन लोगोंने भी अपने बड़े भाइयोंके मार्गका ही अनुसरण किया। पुत्रोंके ऐसे विनाशको देखकर (क्रुद्ध) दक्षने नारदको शाप दे दिया कि 'तुम्हें भी (पृथ्‍वीपर) जन्म लेना होगा।' अतः नारद कश्यपमुनिके पुत्ररूपमें उत्पन्न हुए।

इसके बाद दक्ष प्रजापतिने असिक्नीसे साठ रूपवती कन्याओंको जन्म दिया, जिनमेंसे उन्होंने दो कन्याओंका विवाह अङ्गिराके साथ किया। उनके द्वारा दो कन्याएँ कृशाश्व, दस कन्याएँ धर्म, चौदह कन्याएँ कश्यप तथा अट्ठाईस कन्याएँ चन्द्रमाको दी गयीं। हे महादेव! इसके पश्चात् दक्षने मनोरमा, भानुमती, विशाला तथा बहुदा नामक चार कन्याओंका विवाह अरिष्टनेमिके साथ किया।

दक्ष प्रजापतिने कृशाश्वको सुप्रजा और जया नामक कन्याओंको प्रदान किया। अरुन्धती, वसु, यामी, लम्बा, भानुमती, मरुत्वती, सङ्कल्पा, मुहूर्ता, साध्या तथा विश्वा—ये धर्मकी दस पत्नियाँ कही गयी हैं। अब मैं कश्यपकी पत्नियोंके नामोंको भी कहता हूँ, उनके नाम हैं—अदिति, दिति, दनु, काला, अनायु, सिंहिका, मुनि, कद्रू, साध्या, इरा, क्रोधा, विनता, सुरभि और खगा।

हे रुद्र! (धर्मकी पत्नी) विश्वासे विश्वेदेव और साध्यासे साध्यगणोंकी उत्पत्ति हुई है। मरुत्वतीसे मरुत्वान् तथा वसुसे (आठ) वसुगणोंका आविर्भाव हुआ। हे शङ्कर! भानुसे (द्वादश) भानु और मुहूर्तासे मुहूर्तगणोंकी उत्पत्ति हुई। लम्बासे घोष तथा यामीसे नागवीथिका जन्म हुआ और सङ्कल्पासे सर्वात्मक सङ्कल्पका प्रादुर्भाव हुआ।

आप, ध्रुव, सोम, धर, अनिल, अनल, प्रत्यूष तथा प्रभास—ये आठ वसु माने गये हैं। आपके वेतुण्डि, श्रम, श्रान्त और ध्वनि नामक चार पुत्र हुए। ध्रुवके पुत्ररूपमें भगवान् कालका जन्म हुआ, जो लोकके संहारक हैं। सोमसे पुत्ररूपमें भगवान् वर्चाहए, जिनकी कृपासे ही मनुष्य वर्चस्वी होता है। मनोहरासे धरके द्रुहिण, हुत, हव्यवह, शिशिर, प्राण और रमण नामवाले पुत्र उत्पन्न हुए। अनिलकी पत्नीका नाम शिवा है। अनिल और शिवासे पुलोमज तथा अविज्ञातगति नामके दो पुत्र उत्पन्न हुए। अनल (अग्नि)-के पुत्र कुमार हैं, जिनकी उत्पत्ति शरकाननपर हुई थी। कृत्तिकाओंके पालित पुत्र होनेसे इन्हें कार्तिकेय भी कहा जाता है। इनके शाख, विशाख और नैगमेय नामक तीन अन्य छोटे भाई भी हैं।