Skip to content
SarvaKosh
गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण

Garuda Purana

by महर्षि वेदव्यास

Report a copyright issue

DevanagariHindipublished634 pages

Page 106 of 634

Read in context
Page 106
९६संक्षिप्त गरुड़पुराण[ आचार-

भूभाग हैं। माण्डव्य, तुषार, मूलिका, अश्ममुख, खश, महाकेश, महानास देश उत्तर-पश्चिमभागमें स्थित हैं।

लम्बक, स्तननाग, माद्र, गान्धार, बाह्निक तथा म्लेच्छ देश हिमाचलके उत्तरतटवर्ती भूभागमें स्थित हैं। त्रिगर्त, नील, कोलात, ब्रह्मपुत्र, सटङ्गण, अभीषाह और कश्मीर देश उत्तर-पूर्व-दिशामें अवस्थित कहे गये हैं। (अध्याय ५५)


प्लक्ष तथा पुष्कर आदि द्वीपों एवं पाताल आदिका निरूपण

श्रीहरिने कहा—प्लक्षद्वीपके स्वामी मेधातिथिके सात पुत्र थे। उन सबमें शान्तभव नामक पुत्र ज्येष्ठ था। उससे छोटा शिशिर था। तदनन्तर सुखोदय, नन्द, शिव और क्षेमक हुए। उनका जो सातवाँ भाई था, वह ध्रुव नामसे प्रसिद्ध हुआ—ये सभी प्लक्षद्वीपके राजा बने।

इस द्वीपमें गोमेद, चन्द्र, नारद, दुन्दुभि, सोमक, सुमनस और वैभ्राज नामक सात पर्वत हैं। यहाँ अनुप्ता, शिखी, विपाशा, त्रिदिवा, क्रमु, अमृता तथा सुकृता नामकी सात नदियाँ प्रवाहित होती रहती हैं।

वपुष्मान् शाल्मकद्वीपके स्वामी थे। उस द्वीपमें अवस्थित सात वर्षोंके नामसे ही प्रसिद्ध उनके सात पुत्र थे, जिनके नाम श्वेत, हरित, जीमूत, रोहित, वैद्युत, मानस और सुप्रभ हैं।

यहाँ कुमुद, उन्नत, द्रोण, महिष, बलाहक, क्रौञ्च तथा ककुद्मान् नामक सात पर्वत हैं। योनि, तोया, वितृष्णा, चन्द्रा, शुक्ला, विमोचनी और विधृति—ये सात नदियाँ हैं। ये पापोंका प्रशमन करनेवाली हैं।

कुशद्वीपमें ज्योतिष्मान्‌का स्वामित्व था। उनके भी सात पुत्र उत्पन्न हुए थे। वे उद्भिद, वेणुमान्, द्वैरथ, लम्बन, धृति, प्रभाकर और कपिल नामसे प्रसिद्ध थे। उन्हींके नामसे इस द्वीपके जो सात वर्ष थे, वे प्रसिद्ध हुए। यहाँ विद्रुम, हेमशैल, द्युमान्, पुष्पवान्, कुशेशय, हरि तथा मन्दराचल नामक सात वर्षपर्वत हैं। यहाँ धूतपापा, शिवा, पवित्रा, सन्मति, विद्युद्दभ्र, मही और काशा नामकी ये सात नदियाँ हैं, जो सब प्रकारके पापोंको विनष्ट करनेवाली हैं।

हे शिव! क्रौञ्चद्वीपके अधीश्वर महात्मा द्युतिमान्‌के भी सात पुत्र हुए। कुशल, मन्दग, उष्ण, पीवर, अन्धकारक, मुनि और दुन्दुभि—ये उनके नाम हैं।

यहाँ क्रौञ्च, वामन, अन्धकारक, दिवावृत्, महाशैल, दुन्दुभि तथा पुण्डरीकवान् नामके सात वर्षपर्वत हैं। यहाँपर गौरी, कुमुद्वती, संध्या, रात्रि, मनोजवा, ख्याति और पुण्डरीका—ये सात नदियाँ (प्रवाहित होती रहती) हैं।

शाकद्वीपके राजा भव्यके भी सात पुत्र उत्पन्न हुए। वे जलद, कुमार, सुकुमार, अरूणीबक, कुसुमोद, समोदार्कि तथा महाद्रुम नामसे ख्यातिप्राप्त थे। यहाँ सुकुमारी, कुमारी, नलिनी, धेनुका, इक्षु, वेणुका और गभस्ति नामसे प्रसिद्ध सात नदियाँ हैं।

पुष्करद्वीपके स्वामी महाराज शबलके महावीर तथा धातकि नामक दो पुत्र हुए। उन्हींके नामसे यहाँपर दो वर्ष हैं। इन दोनोंके मध्य एक ही मानसोत्तर नामक वर्षपर्वत है। यह पचास सहस्र योजनमें विस्तृत तथा इतना ही ऊँचा है। यह चतुर्दिक् विस्तारमें भी उसी परिमाणको प्राप्तकर मण्डलाकार अवस्थित है। इस पुष्करद्वीपको स्वादिष्ट जलवाला समुद्र चारों ओरसे घेरकर स्थित है। उस

Garuda Purana · Page 106 of 634 · SarvaKosh