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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

by महापण्डित राहुल सांकृत्यायन

DevanagariHindipublished213 pages

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६२ ] धम्मपदं [ १०।८
( स चेत् नेरयसि आत्मानं कांस्यमुपहतं यथा ।
एष प्राप्तोऽसि निर्वाणं संरम्भस्ते न विद्यते ॥६॥ )
अनुवाद—कठोर वचन न बोलो, बोलनेपर (दूसरे भी वैसे ही)
तुम्हें बोलेंगे, दुर्वचन दुःखदायक (होते हैं), (बोलनेसे)
बदलेमें तुम्हें दण्ड मिलेगा। टूटा कांसा जैसे निःशब्द रहता
है, (वैसे) यदि तुम अपनेको (निःशब्द रक्खो), तो
तुमने निर्वाणको पालिया, तुम्हारे लिये कलह (=हिंसा)
नहीं रही।
श्रावस्ती (पूर्वाराम) विसाखा आदि (उपासिकायें)
१३५-यथा दण्डेन गोपालो गावो पाचेति गोचरं ।
एवं जरा च मच्चू च आयुं पाचेन्ति पाणिनं ॥७॥
( यथा दण्डेन गोपालो गाः प्राजयति गोचरम् ।
एवं जरा च मृत्युश्चायुः प्राजयतः प्राणिनाम् ॥७॥ )
अनुवाद—जैसे ग्वाला लाठीसे गायोंको चरागाहमें ले जाता है; वैसे
ही बुढ़ापा और मृत्यु प्राणियोंकी आयुको ले जाते हैं।
राजगृह (वेणुवन) अजगर (प्रेत)
१३६-अथ पापानि कम्मानि करं बालो न बुज्झति ।
सेहि कम्मेहि दुम्मेधो अग्गिदड्ढो 'व तप्पति ॥८॥
(अथ पापानि कर्माणि कुर्वन् बालो न बुध्यते ।
स्वैः कर्मभिः दुर्मेधा अग्निदग्ध इव तप्यते ॥८॥)
अनुवाद—पाप कर्म करते वक्त मूढ़ (पुरुष उसे) नहीं बूझता, पीछे