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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

by महापण्डित राहुल सांकृत्यायन

DevanagariHindipublished213 pages

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२१—पकिरणकवग्गो
राजगृह ( वेणुबन ) गङ्गावरोहण
२९०-मत्तासुखपरिच्चागां पस्से चे विपुलं सुखं ।
चजे मत्तासुखं धीरो सम्पस्सं विपुलं सुखं ॥१॥
( मात्रासुखपरित्यागात् पश्येच्चेद् विपुलं सुखम् ।
त्यजेन्मात्रासुखं धीरः संपश्यन् विपुलं सुखम् ॥१॥ )
अनुवाद—थोड़ेसे सुखके परित्यागसे यदि बुद्धिमान् विपुल सुख
( का लाभ ) देखे, तो विपुल सुखका ख्याल करके थोड़ेसे
सुखको छोड़ दे ।
जेतवन कोई पुरुष
२६१-परदुक्खूपदानेन यो अत्तनो सुखमिच्छति ।
वेरसंसग्गसंसट्ठो वेरा सो न पमुच्चति ॥२॥
( परदुःखोपदानेन य आत्मनः सुखमिच्छति ।
वैरसंसर्गसंसृष्टो वैरात् स न प्रमुच्यते ॥२॥ )
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