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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

by महापण्डित राहुल सांकृत्यायन

DevanagariHindipublished213 pages

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१९।१७ ] धम्मट्ठवग्गो [ १२१
(स्पृशामि नैष्कर्म्यसुखं अपृथग्जनसेवितम् ।
भिक्षो ! विश्वासं मा पादीः अप्राप्त आस्रवक्षयम् ॥१७॥ )
अनुवाद—केवल शील और व्रतसे, बहुश्रुत होने (मात्र) से,
या (केवल) समाधिलाभसे, या एकान्तमें शयन करनेसे,
पृथग्जन (=अज्ञ) जिसे नहीं सेवन कर सकते, उस
नैष्कर्म्य (=निर्वाण)-सुखको मैं अनुभव नहीं कर रहा
हूँ; हे भिक्षुओ ! जब तक आस्रवों (=चित्तमलो) का क्षय
न हो जाये, जब तक चुप न बैठे रहो ।
१९—धर्मस्थवर्ग समाप्त