देवी भागवत महापुराण
Devi Bhagavata Purana
by महर्षि वेदव्यास
Source: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (origin)
Page 712 of 889
Read in context| अ० ३२ ] | पञ्चम स्कन्ध | ७०३ |
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| ववुर्वाताः शिवास्तत्र दिशश्च विमला भृशम्॥ ६३<br><br>बभूवुश्चाग्नयो होमे प्रदक्षिणशिखाः शुभाः।<br>हतशेषाश्च ये दैत्याः प्रणम्य जगदम्बिकाम्॥ ६४<br><br>त्यक्त्वायुधानि ते सर्वे पातालं प्रययुर्नृप।<br>एतत्त्ते सर्वमाख्यातं देव्याश्चरितमुत्तमम्॥ ६५<br><br>शुम्भादीनां वधं चैव सुराणां रक्षणं तथा।<br>एतदाख्यानकं सर्वं पठन्ति भुवि मानवाः॥ ६६<br><br>शृण्वन्ति च सदा भक्त्या ते कृतार्था भवन्ति हि।<br>अपुत्रो लभते पुत्रान्निर्धनश्च धनं बहु॥ ६७<br><br>रोगी च मुच्यते रोगात्सर्वान्कामानवाप्नुयात्।<br>शत्रुतो न भयं तस्य य इदं चरितं शुभम्।<br>शृणोति पठते नित्यं मुक्तिभाग्जायते नरः॥ ६८ | सुखदायक पवन बहने लगा तथा सभी दिशाएँ अत्यन्त निर्मल हो गयीं। हवन करते समय [शुभ सूचनाके रूपमें] अग्निकी पवित्र ज्वालाएँ दाहिनी ओरसे उठने लगीं॥ ६३ ½॥<br><br>हे राजन्! जो दानव मरनेसे बच गये थे, वे सभी जगदम्बिकाको प्रणाम करके अपने-अपने आयुध त्यागकर पाताल चले गये॥ ६४ ½॥<br><br>देवीका उत्तम चरित्र, शुम्भ आदि दैत्योंका वध तथा देवताओंकी रक्षा—इन सबका वर्णन आपसे कर दिया। पृथ्वीपर रहनेवाले जो मनुष्य इस समस्त आख्यानका भक्तिभावसे निरन्तर पठन तथा श्रवण करते हैं, वे निश्चितरूपसे कृतार्थ हो जाते हैं। पुत्रहीनको पुत्र प्राप्त होते हैं, निर्धनको विपुल सम्पदा सुलभ हो जाती है तथा रोगी रोगसे मुक्त हो जाता है। वह सभी वांछित फल प्राप्त कर लेता है और उसे शत्रुओंसे किसी प्रकारका भय नहीं रह जाता है। जो मनुष्य इस पवित्र आख्यानका नित्य पठन तथा श्रवण करता है, वह अन्तमें मोक्षका भागी हो जाता है॥ ६५—६८॥ |
इति श्रीमद्देवीभागवते महापुराणेऽष्टादशसाहस्र्यां संहितायां पञ्चमस्कन्धे
शुम्भवधो नामैकत्रिंशोऽध्यायः॥ ३१॥
अथ द्वात्रिंशोऽध्यायः
देवीमाहात्म्यके प्रसंगमें राजा सुरथ और समाधि वैश्यकी कथा
| जनमेजय उवाच<br>महिमा वर्णितः सम्यक्चण्डिकायास्त्वया मुने।<br>केन चाराधिता पूर्वं चरित्रत्रययोगतः॥ १ | जनमेजय बोले— हे मुने! आपने भगवती चण्डिकाकी महिमाका भलीभाँति वर्णन किया। अब आप यह बतानेकी कृपा करें कि तीन चरित्रोंका प्रयोग करके पहले किसने भगवतीकी आराधना की थी?॥ १॥ |
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| प्रसन्ना कस्य वरदा केन प्राप्तं फलं महत्।<br>आराध्य कामदां देवीं कथयस्व कृपानिधे॥ २ | वे वरदायिनी भगवती किसके ऊपर प्रसन्न हुईं? सम्पूर्ण कामनाओंको पूर्ण करनेवाली देवीकी उपासना करके किसने महान् फल प्राप्त किया? हे कृपानिधान! यह सब बताइये॥ २॥ |
| उपासनाविधिं ब्रह्मंस्तथा पूजाविधिं वद।<br>विस्तरेण महाभाग होमस्य च विधिं पुनः॥ ३ | हे ब्रह्मन्! हे महाभाग! जगदम्बाकी उपासनाविधि, पूजाविधि तथा हवनविधिका भी विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिये॥ ३॥ |