चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)
Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation
by महर्षि चरक व अग्निवेश
Source: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (origin)
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Read in contextआह्लादित करता है वह 'तिक्त' रस है । जिस रस के खाने से जीभ स्वच्छ,
जड़ और स्तम्भित हो जाती है और गले को रोक देता है और हृदय को
पीड़ित करता है, वह 'कषाय' रस है ॥ ७०-७६ ॥
एवंवादिनं भगवन्तमात्रेयं पुनरग्निवेश उवाच—भगवन् ! श्रुत-
मेतदवितथमर्थसंपद्युक्तं भगवतो यथावद् द्रव्यगुणकर्माधिकारे वचः,
परं त्वाहारविकाराणां वैरोधिकानां लक्षणमनतिसंक्षेपेणोपदिश्यमानं
शुश्रूषामह इति ॥ ७७ ॥
तमुवाच भगवान्नात्रेयः—देहधातुप्रत्यनीकभूतानि द्रव्याणि देह-
धातुभिर्विरोधमापद्यन्ते, परस्परगुणविरुद्धानि कानिचित् कानिचित्सं-
योगात्संस्कारादपराणि देश-काल-मात्रादिभिश्चापराणि तथा स्वभावा-
दपराणि ॥ ७८ ॥
तत्र यान्याहारमधिकृत्य भूयिष्ठमुपयुज्यन्ते तेषामेकदेशं वैरोधिक-
मधिकृत्योपदेक्ष्यामः—न मत्स्यान् पयसा सहाभ्यवहरेत्, उभयं
ह्येतन्मधुरं मधुरविपाकं महाभिष्यन्दि शीतोष्णत्वाद्विरुद्धवीर्यं विरुद्ध-
वीर्यत्वाच्छोणितप्रदूषणाय महाभिष्यन्दित्वान्मागर्गापरोधाय चेति ॥७९॥
इस प्रकार से कहते हुए महर्षि आत्रेय को अग्निवेश ने कहा कि हे
भगवन् ! आपने द्रव्यगुण कर्म के विषय में जो कुछ अर्थयुक्त वाणी कही है,
वह यथार्थ रूप में सुन ली । परन्तु विरुद्ध आहार के लक्षणों को विस्तार से
सुनने की इच्छा से, इसलिये आप उसको प्रतिपादन करें । इस पर आत्रेय ऋषि
ने कहा—शरीर के रसादि सात धातु या वातादि दोष, इनको प्रकृति के विरुद्ध
करने (दूषित करने) वाले द्रव्यों से शरीर के धातु बिगड़ जाते हैं। इन द्रव्यों में
कुछ द्रव्य परस्पर गुणों से कुछ संयोग से और कुछ संस्कार से, कुछ देश, काल,
मात्रा से और कुछ स्वभाव से ही दूषित करने वाले (विरोधी गुण के) होते हैं।
परस्पर विरुद्ध जैसे मछलियों को दूध के साथ खाना । संयोग विरुद्ध-जैसे पके हुए
बड़हल को उड़दों में मिलाकर खाना । संस्कार विरुद्ध-जैसे कबूतर को सरसों
के तेल में भून कर खाना । देश दो प्रकार का है, भूमि और शरीर । भूमि
विरुद्ध—राख और धूल में मिला भोजन या परोक्ष में बना भोजन खाना ।
शरीरविरुद्ध—उष्णावस्था में मधु खाना । समयविरुद्ध-वासी रक्खा मकोय का
; खाना । मात्रा विरुद्ध—एक वजन में मधु और घी खाना । स्वभाव विरुद्ध-
विष ओज के विरुद्ध दसगुण रखता है। इनमें से जो विरोधी द्रव्य