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ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

Brahma Sutras with Shankara Bhashya - Gita Press

by महर्षि बादरायण / आदि शङ्कराचार्य

Source: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1950 (origin)

DevanagariSanskritpublished417 pages

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६२ वेदान्त-दर्शन [ पाद ३
च=इसके सिवा; स्मर्यते अपि=यही बात स्मृतिमे भी कही गयी है ।
व्याख्या—परब्रह्म परमेश्वर सबके हृदयमे स्थित है और वह छोटे-से भी छोटा
है—ऐसा वर्णन स्मृतियोंमें इस प्रकार आया है—'सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टः।'
( गीता १५। १५ ) । 'हृदि सर्वस्य विष्ठितम्।' ( गीता १३। १७ ) ।
'ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति।' ( गीता १८। ६१ ) । 'अविभक्तं
च भूतेषु विभक्तमिव च स्थितम्।' ( गीता १३। १६ ) । 'अणोरणीयांसम्।'
( गीता ८। ९) इत्यादि। ऐसा वर्णन होनेके कारण उस सर्वव्यापी परब्रह्म परमेश्वरको
स्थानकी अपेक्षासे छोटे आकारवाला कहना उचित ही है । अतः 'दहर'
शब्दसे परब्रह्म परमेश्वरका ही वर्णन है, जीवात्माका नहीं।
सम्बन्ध—उपर्युक्त विवेचन पढकर यह जिज्ञासा होती है कि कठोपनिषद्
( २। १ । १२, १३ तथा २ । ३ । १७ ) में जिसे अङ्गुष्ठके बराबर
बताया गया है, वह जीवात्मा हे या परमात्मा ? अतः इसका निर्णय करनेके
लिये अगला प्रकरण आरम्भ किया जाता है—
शब्दादेव प्रमितः ॥ १ । ३ । २४ ॥
शब्दात्=( उक्त प्रकरणमे आये हुए ) शब्दसे; एव=ही; ( यह सिद्ध
होता है कि ) प्रमितः=अङ्गुष्ठमात्र परिमाणवाला पुरुष ( परमात्मा ही है ) ।
व्याख्या—कठोपनिषद्मे कहा है कि 'अङ्गुष्ठमात्रः पुरुषो मध्य आत्मनि
तिष्ठति।' ( २ । १ । १२ ) तथा 'अङ्गुष्ठमात्रः पुरुषो ज्योतिरिवाधूमकः ।
ईशानो भूतभव्यस्य स एवाद्य स उ श्वः ॥' ( २ । १ । १३ ) । अर्थात्
'अङ्गुष्ठके बराबर मापवाला परम पुरुष शरीरके मध्यभाग ( हृदय ) में स्थित है।'
तथा अङ्गुष्ठके बराबर मापवाला परम पुरुष धूमरहित ज्योतिकी भाँति एकरस
है, वह भूत, वर्तमान और भविष्यपर शासन करनेवाला है । वह आज भी
है और कल भी रहेगा; अर्थात् वह नित्य सनातन है।' इस प्रकरणमे जिसे
अङ्गुष्ठके बराबर मापवाला पुरुष बताया गया है, वह परब्रह्म परमात्मा ही है;
यह बात उन्हीं मन्त्रोमे कहे हुए शब्दोंसे सिद्ध होती है । क्योंकि वहाँ उस
पुरुषको भूत, वर्तमान और भविष्यमे होनेवाली समस्त प्रजाका शासक, धूमरहित
अग्निके सदृश एकरस और सदा रहनेवाला बताया गया है तथा आगे चलकर
उसीको विशुद्ध अमृतस्वरूप जाननेके लिये कहा गया है ( २ । ३ । १७ ) ।