ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)
Brahma Sutras with Shankara Bhashya - Gita Press
by महर्षि बादरायण / आदि शङ्कराचार्य
Source: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1950 (origin)
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Read in contextसूत्र १९-२१ ] अध्याय ३ २४१
अन्तर्भावात् = शरीरके भीतर स्थित होनेके कारण; वृद्धिहासभाक्त्वम् =
शरीरकी भाँति परमात्माके बढ़ने-घटनेवाला होनेकी सम्भावना होती है, अतः
(उसके निषेधमे); उभयसामञ्जस्यात् = परमात्मा और चन्द्रप्रतिविम्ब—इन दोनोंकी
समानता है, इसलिये; एवम् = इस प्रकारका दृष्टान्त दिया गया है।
व्याख्या—उपमा उपमेय वस्तुके किसी एक अंशकी समानताको लेकर
दी जाती है। पूर्णतया दोनोंकी एकता हो जाय तब तो वह उपमा
ही नहीं कही जायगी; अपितु वास्तविक वर्णन हो जायगा। अतः यहाँ
जिस प्रकार चन्द्रमाका प्रतिबिम्ब जलमे रहता हुआ भी जलके घटने-बढने आदि
विकारोसे सम्बद्ध नहीं होता, वैसे ही परब्रह्म परमेश्वर सबमे रहता हुआ भी
निर्विकार रहता है, उनके घटने-बढने आदि किसी भी विकारसे वह लिप्त नहीं
होता। इतना ही आशय इस दृष्टान्तका है, इसलिये इस दृष्टान्तसे यह शङ्का
नहीं करनी चाहिये कि परमात्माकी सब प्राणियोमे जो स्थिति बतायी गयी है,
यह भी चन्द्रमाके प्रतिबिम्बकी भाँति अवास्तविक (झूठी) होगी।
सम्बन्ध—प्रकारान्तरसे पुनः उस भ्रमकी निवृत्ति की जाती है—
दर्शनाच्च ॥ ३ । २ । २१ ॥
दर्शनात् = श्रुतिमे दूसरे दृष्टान्त देखे जाते हैं, इसलिये; च = भी (यही सिद्ध
होता है कि परमात्माकी स्थिति प्रतिबिम्बकी भाँति अवास्तविक नहीं है)।
व्याख्या—कठोपनिषद् (२।२।९) मे कहा है कि—
अग्निर्यथैको भुवनं प्रविष्टो रूपं रूपं प्रतिरूपो बभूव ।
एकस्तथा सर्वभूतान्तरात्मा रूपं रूपं प्रतिरूपो बहिश्च ॥
'जिस प्रकार समस्त ब्रह्माण्डमें प्रविष्ट हुआ एक ही अग्नि नाना रूपोंमे उनके
सदृश रूपवाला हो रहा है, उसी प्रकार सब प्राणियोका अन्तरात्मा परमेश्वर एक
होता हुआ ही नाना रूपोमे प्रत्येकके रूपवाला-सा हो रहा है तथा उनके बाहर
भी है।' अग्निकी ही भाँति वहाँ वायु और सूर्यके दृष्टान्तसे भी परमेश्वरकी वस्तुगत
गुण-दोषसे निर्लेपता सिद्ध की गयी है। (क० उ० २ । २ । १०-११) इस
प्रकार प्रतिबिम्बके अतिरिक्त दूसरे दृष्टान्त, जो उस ब्रह्मकी स्थितिके सत्यत्वका
प्रतिपादन करनेवाले हैं, वेदमे देखे जाते हैं; इसलिये भी प्राणियोंमें और प्रत्येक
वस्तुमे उस परब्रह्म परमेश्वरकी स्थिति प्रतिबिम्बकी भाँति आभासमात्र नहीं; किन्तु
वे० द० १६—