ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)
Brahma Sutras with Shankara Bhashya - Gita Press
by महर्षि बादरायण / आदि शङ्कराचार्य
Source: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1950 (origin)
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Read in contextसूत्र २८-२९ ] अध्याय १ १०१
एतेन सर्वे व्याख्याता व्याख्याताः ॥ १ । ४ । २९ ॥
एतेन=इस विवेचनसे; सर्वे व्याख्याताः=सभी पूर्वपक्षियोंके प्रश्नोंका
उत्तर दे दिया गया। व्याख्याताः=उत्तर दे दिया गया।
व्याख्या—इस प्रकार विवेचनपूर्वक यह सिद्धान्त स्थिर कर दिया गया कि 'ब्रह्म
ही जगत्का उपादान और निमित्त कारण है; सांख्यकथित प्रधान ( जडप्रकृति )
नहीं।' इस विवेचनसे प्रधानकारणवादी सांख्योंकी ही भाँति परमाणुकारणवादी
नैयायिक आदिके मतोंका भी निराकरण कर दिया गया—यह सूत्रकार स्पष्ट
शब्दोंमें घोषित करते हैं। 'व्याख्याता' पदका दो बार प्रयोग अध्यायकी समाप्ति
सूचित करनेके लिये है।
चौथा पाद सम्पूर्ण।
श्रीवेदव्यासरचित वेदान्त-दर्शन (ब्रह्मसूत्र) का
पहला अध्याय पूरा हुआ।