ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
by आचार्य ब्रह्मगुप्त
DevanagariHindipublished737 pages
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घटिकांगुलांतरस्थे वार्यांगुटके घंटीधूतैरन्यः ।
उपरिनरोतः सुषिरस्तिर्यक् कीलोस्य मुखमध्ये ॥ ४३ ॥
कीलो परिगामिन्यां वीर्याबद्धं सपारतमलांबु ।
स्त्रवति जलोत्क्षिपति नरो गुटिकां कुर्मोद्यश्चैवम् ॥ ४४ ॥
जलपूर्णकृतघटीभिस्तनस्य कर्णादिभिर्जलं श्रिपति ।
पुरुषोन्यर्द्धो सत्वं चक्रचतुष्कस्य कृतमुपरि ॥ ४५ ॥
४३. (घ) (वि०— इसकी क्रमसंख्या ४४ है)
१. वीर्यांगुटके (ग) वीर्यांगुडकं for (वार्यांगुटके)
२. घंटीधृतीरन्यः for (घंटीधूतैरन्यः) ३. उपरितनरांत for (उपरिनरोतः)
(ग) ४. सुषिरस्तिर्यक् (ङ) for (सुषिरस्तिर्यक्)
(वि०— इसकी श्लोक संख्या ४७ है)
(च) १. वीर्या for (वार्या)
(वि०— इसकी श्लोकसंख्या ४४ है)
(ङ) १. वीर्याङ्गुलकै for (वार्यांगुटकै)
३. नरोतः for (नरोनः)
४४. (घ) ((वि०— इसकी क्रमसंख्या ४५ है) १. चौर्यार्बद्धं for (वीर्याबद्धं)
२. लाबु for (लांबु) ३. स्रवति (ग) (च) (ङ) for (स्त्रवति)
४. जले (ग) (च) (ङ) for (जलो)
५. कूर्मादयश्चैवम् (ग) कूर्मादयाश्चैवम् ॥४८॥ for (कुर्मोद्यश्चैवम्)
(वि०— इसकी श्लोक संख्या ४८ है)
(च) २. लाबु for (लांबु)
५. कूर्मादयश्चैवं for (कुर्मोद्यश्चैवम्)
(ङ) १. चीर्यांधं for (वीर्याबद्धं)
२. लाबुतु for (लांबु) ६. द्वपारदम् for (सपारतम)
४५. (घ) (वि०— इसकी क्रमसंख्या ४६ है)
१. स्तनास्य (ग) (ङ) for (स्तनस्य)
२. पुरुषोऽन्यद्वासत्वं (ग) पुरुषोन्द्यर्द्धासित्व for (पुरुषोन्यर्द्धोसत्वं)
(ग) ३. क्षिपितम् for (श्रिपति) ४. अनमुपरि ॥४६॥ for (कृतमुपरि ॥४५॥)
(वि— इसकी श्लोक संख्या ४६ है)
(च) ३. क्षिपति for (श्रिपति)
२. ऽन्यर्द्धा for (न्यर्द्धो) क्रमसंख्या ४६ है ।
(ङ) ३. क्षिपति for (श्रिपति) २. पुरुषोऽन्यर्धासक्तं for (पुरुषोन्यर्द्धोसत्वं)