ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
by आचार्य ब्रह्मगुप्त
Page 691 of 737
Read in context( ३०६ )
छायांहृज्ज्या यष्टिश्छायाकर्णं मवलम्बकम् शंकुं ।
परिकल्प्यां शंकु यन्त्रे योज्यं घटिकादिषुष्टद्युक्तम् ॥ ३६ ॥
घटिकाकलशार्द्धं कृतिताम्र पात्रं तले गुरुच्छिद्रम् ।
मध्येतज्जलमज्जन षष्टचा द्युन्निशं यथा भवति ॥ ३७ ॥
मध्याध्व्यस्तनतांशैः कपालकं दिवकत्थ सूत्रात् मग्रात् ।
व्यस्तोन्नतांशा विवरे सूत्र क्या पाततो नाड्यः ॥ ३८ ॥
३६. (घ) (वि०--इसकी क्रम संख्या ३७ है)
१. छायाकर्णं (ग) (च) (ङ) for (छायाकर्ण)
२. परिकल्प्या (ग) परिकल्प्य (ङ) for (परिकल्प्यां)
३. घटिकादि पुष्टद्युक्तम् (ग) घटिकादि यद्युक्तम् for (घटिकादि पुष्टद्युक्तम्)
(ग) ४. हृज्ज्यां (ङ) for (हृज्ज्या) (वि०--इसकी श्लोकसंख्या ४० है)
(च) २. परिकल्प्य शंकु for (परिकल्प्यांशंकु)
३. घटिकादिसंयुक्तम् for (घटिकादिषु पृद्युक्तम्)
(वि०--क्रमसंख्या ३७ अंकित है) (ङ) ५. दृष्टि for (यष्टि)
३७. (घ) (वि०--इसकी क्रमसंख्या ३८ है)
१. कलशार्द्धाकृति (ग) कलाशताद्धा for (कलशार्द्धं)
(ग) २. कृतिताम्रं for (कृतिताम्रं) ३. पृथु for (गुरु)
४. मज्ञान for (मज्जन) (वि०--इसकी श्लोकसंख्या ४१ है)
(च) २. कृतिताम्रं (ङ) for (कृतिताम्रं)
(वि०--इसकी क्रमसंख्या ३८ अंकित है) (ङ) कलसार्धा for (कलशार्द्धं)
३. पृथुच्छिद्रम् for (गुरुच्छिद्रम्)
३८. (घ) (वि०--इसकी क्रमसंख्या ३६ है)
१. द्वस्त (ग) मध्यद्वस्तनतांशै for (मध्यस्तनतांशैः)
२. दिवक्स्थ (ग) दिवस्थ (ङ) for (दिवकत्थ)
३. सूत्रमग्राग्रात् (ग) मूत्रमग्रात् for (सूत्रात्मग्रात्)
(ग) (वि०--इसकी श्लोकसंख्या ४२ है)
४. व्यस्तोन्नत्यंश for (व्यस्तोन्नतांशा) (च) १. द्वस्त for (ध्यस्त)
२. दिकस्थ for (दिवकत्थ) ३. सूत्रमग्राग्रात् for (सूत्रात्मग्रात्)
४. व्यस्तोन्नतांश for (व्यस्तोन्नतांशा) ५. विववरे for (विवरे)
६. (वि०--क्रमसंख्या ३६ for (३८)
(ङ) १. मध्याद्यस्त्वनतांशैः for (मध्याध्यस्तनतांशैः)
३. सूत्रमध्याग्रात् for (सूत्रात्मग्रात्) ४. व्यस्तोन्नतांश for (व्यस्तोन्नतांशा)