ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
by आचार्य ब्रह्मगुप्त
Page 686 of 737
Read in context( ३०४ )
यष्टि व्यासाद्धं$^४$ तु विवृत्तं भगणांशांकितं$^१$ कृत्वा$^७$ ।
यष्टिकीलप्रोते$^२$ मूले$^५$ पृथग्भगग्रयो$^६$ विद्धे$^३$ ॥ २१ ॥
ताभ्यां$^१$ सूर्यशशांकौ वेध्यावर्ग$^४$स्थितेन सूत्रेण ।
सूत्रज्यायांतरां शायेतेऽर्क$^५$ विभाजिता स्थितयः$^३$ ॥ २२ ॥
सूत्राद्धंगुणा त्रिज्या यष्टिहता$^१$ फलधनुर्द्धिगुणितं$^२$ वा ।
रविचंद्रातरमिष्टव्यासाद्धोल्लित$^३$वृत्तस्य ॥ २३ ॥
मध्यधृतायायष्टे लंबकशंकुप्रवेशनिर्गमने ।
क्रांतिवशात्प्राच्यपरे मत्साद्याम्योत्तरे$^१$ साध्ये ॥ २४ ॥
२१. (घ) १. भगणांशकांकितं (ग) (च) for (भगणांशांकितं)
२. यष्टी (ग) (ङ) (च) for (यष्टि)
३. विद्धे (ग) विधि: (विधेः) for (विद्धे)
(ग) ४. व्यासाद्धू वि (ङ) for (व्यासाद्धात्तुवि)
५. मूल for (मूले) ६. प्रथग्रयो (च) for (पृथग्भगग्रयो)
(वि०—इसकी श्लोकसंख्या २४ है)
(च) ४. भुविवृत्तं for (तुविवृत्तं)
७. क्रत्वा for (कृत्वा) ३. विद्धं for (विद्धे)
(ङ) १. भगणांशकं for (भगणांशांकितं) ६. पृथगग्रयो for (पृथग्भगग्रयो)
३. बंद्धे for (विद्धे)
२२. (घ) १. वाभ्यां for (ताभ्यां)
२. ज्यायंतरांशा (ग) (च) (ङ) for (सूत्रज्यायांतरांशा)
३. स्तितयः (ग) (च) (ङ) for (स्थितयः)
(ग) ४. वग्र (च) (ङ) for (वर्ग) ५. येनेऽर्क for (येतेऽर्क)
(वि०—इसकी श्लोकसंख्या २५ है)
(च) ५. येतेऽर्कं for (येतेऽर्क)
२३. (घ) १. हृता (ग) (ङ) (च) for (हता)
२. द्विगुणितं (ग) (ङ) (च) for (द्धिगुणितं)
३. व्यासाद्धोल्लिखित (ग) (ङ) (च) for (व्यासाद्धोल्लित)
(ग) ४. रविचंद्रांतर (च) for (रविचंद्रातर) (वि०—इसकी श्लोकसंख्या २६ है)
२४. (घ) १. मत्स्याद्यामोत्तरे (ङ) (ग) मत्स्याद्याम्योत्तरे for (मत्साद्याम्योत्तरे)
(ग) २. (वि०—इसकी श्लोकसंख्या २७ है)
(च) १. मत्स्याद्यामोत्तरे for (मत्साद्यामोत्तरे)