Skip to content
SarvaKosh
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

Report a copyright issue

DevanagariHindipublished737 pages

Page 670 of 737

Read in context
Page 670

( २८६ )
शशिवसुतिथिभि<sup>६</sup> यंमपक्षशररसैः<sup>१</sup> शून्य वस्तु<sup>२</sup> वेदैः ।
व्यर्क<sup>३</sup> व्याप्तांतर गुणमिदु स्फुट कर्णमर्ककर्णाहतम्<sup>४ ५</sup> ॥ ३२ ॥
प्रोह्य भुवो<sup>१</sup> भुच्छाया विष्कंभश्चंद्रकक्षायाम् ।
तद्गुणितं व्यासाद्धं शशिकर्णाहतं ततः<sup>३</sup> प्रमाणकलाः ॥ ३३ ॥
एवं त्रिज्या रविशशि विष्कंभगुणाः<sup>६</sup> स्वकर्णहताः<sup>२</sup> ।
भूछायेंदुश्चंद्रसूर्यं<sup>३</sup> छादयति मानयोगाद्धत्<sup>४ ५</sup> ॥ ३४ ॥

३२. (घ) १. यंम (ग) यमपक्षरासैः ६५२२ for (यमपक्षशररसै)
२. वसु (ग) वसुवेदैः (ङ) for (वस्तुवेदैः)
३. कर्क for (व्यर्क) ४. व्यासांतर (ग) for (व्याप्तांतर)
५. हृतम् (ग) for (हतम्)
(ग) ६. राशिवसुतिथिभिः १५८१ for (शशिवसुतिथिभिः)
(वि०—इस श्लोक के पूर्वार्ध की समाप्ति पर ३२ संख्या होनी चाहिए
परन्तु लिखी हुई ३३ है)
(च) १. यंम for (यम) २. वसु for (वस्तु)
३. ब्यर्क for (व्यर्क) ४. व्यासांतर for (व्याप्तांतर)
५. मर्ककर्णाहृतं for (मर्ककर्णाहतम्)
(ङ) १. यंम for (यम)
३३. (घ) १. भूच्छाया (ग) for (भुच्छाया)
२. कक्षायाम् (ग) कक्षायाम् ।। ३४ ।। for (कक्षायाम्)
३. तमः (ग) (च) (ङ) for (ततः)
(ग) इस श्लोक का उत्तरार्ध अगले श्लोक का पूर्वार्ध है ।
(च) १. प्रोज्यभुवोभूच्छाया for (प्रोह्यभुवोभुच्छाया)
(ङ) १. भूच्छाया for (भुच्छाया)
३४. (घ) १. तृज्याशशि for (त्रिज्यारविशशि) २. हृताः (ग) हृता ।।३५।। for (हताः)
३. सूर्य (ग) (च) (ङ) for (सूर्यं)
४. भूछायेंदु चंद्रः (ग) भूछायेंदूचंद्रः for (भूछायेंदुश्चंद्र)
५. (वि०