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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 603 of 737

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Page 603

( २१७ )
विषुवदय¹मंडलदिशो वलनज्याभि ग्रहोँ²स्तिग्रहवृत्ते ।
संपर्कू₅ ग्राह्य³वायो वेत्ति छेदकज्ञः⁴ सः ॥ ४ ॥
संपर्कमण्डले⁴ यः प्रग्रहमोक्षो²पृथक्³ स्वविक्षेपात् ।
मध्यान्मध्यग्रासं परिलिखित¹ छे⁵दकज्ञः सः ॥ ५ ॥
परिलितीष्टग्रासं तात्कालिक⁵ बाहुकोटिकर्णौ² यः ।
अथवा निमिलनोन्मीलनद्वयं³ छेदकज्ञः⁴ सः ॥ ६ ॥

४. (घ) १. वदमंडल (च) (ङ) for (बदयमंडल)
२. ग्रंहात्त्रि (ग) गृत्रिग्रहवृत्ते for (ग्रहास्तिग्रहवृत्ते)
(ग) ३. ग्रास्यै for (ग्राह्य)
(च) २. ग्रंहात्रिगृहवृत्ते for (ग्रहास्तिग्रहवृत्ते) ४. छेदकज्ञः (ङ) for (छेदकज्ञः)
(ङ) २. भिस्त्रिगृहवृत्ते for (भिग्रहास्तिग्रहवृत्ते) ५. संपर्कं for (संपर्कू) .
३. ग्रासं for (ग्राह्य)
५. (घ) १. परिलिषिति (ग) पिरिलिषति for (परिलिखित)
(ग) २. मोक्षे for (मोक्षो) ३. प्रथक् for (पृथक्)
(च) ४. संपर्ककं for (सम्पर्क) १. परिलिषिति for (परिलिखित)
(ङ) २. मोक्षौ for (मोक्षो) १. परिलिखति for (परिलिखित)
५. च्छेदकज्ञः for (छेदकज्ञः)
६. (घ) १. परिलिषतीष्ट (ग) परिलिषतीष्ट (च) for (परिलितीष्ट)
२. कर्णायैः (च) (ङ) for (कर्णायः)
३. निमीलनोन्मीलन (ग) (च) for (निमिलनोन्मीलन)
४. छेदकज्ञः (च) (ङ) for (छेदकज्ञः)
(ग) ५. तात्कालिबाहुकोटि (ङ) for (तात्कालिकबहुकोटि)
(च) ५. तत्कालि for (तत्कालिक)
(ङ) १. परिलिखतीष्ट for (परिलितीष्ट)